श्री रावतपुरा सरकार विश्वविद्यालय में रिसर्च मेथड्स पर कार्यशाला, विशेषज्ञ प्रो. जी.पी. सिंह ने दिया व्यख्यान…
रायपुर।। श्री रावतपुरा सरकार विश्वविद्यालय में 25 से 26 नवंबर दो दिवसीय कार्यशाला आयोजित की गई हैं। रिसर्च मेथड्स और बेसिक स्टेटिस्टिक्स विषय पर कार्यशाला आयोजित की गई हैं। कार्यशाला के उदघाटन सत्र में मुख्य अतिथि प्रो. प्रदीप कुमार सिन्हा, कुलपति एवं निदेशक डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी अंतर्राष्ट्रीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान, नया रायपुर एवं विषय विशेषज्ञ सांख्यिकी विज्ञान संस्थान के प्रोफेसर, बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से प्रो. जी.पी. सिंह उपस्थित रहे।

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कार्यशाला के उदघाटन सत्र में विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो एस. के. सिंह ने कार्यशाला को सम्बोधित करते हुए उपस्थित अतिथियों और सभी प्रतिभागियों का स्वागत किया। इसके साथ ही विश्वविद्यालय के विकास के लिए की गई कल्पनाओं के बारे में बताया और कहा की विश्वविद्यालय ने अपनी स्थापना के बाद दो ही साल में यूजीसी के द्वारा 12B का दर्जा प्राप्त कर लिया था। इसके बाद उन्होंने कार्यशाला का उद्देश्य बताते हुए उन्होंने रिसर्च की मानयता और महत्व के बारे में बताया और कहा की कार्यशाला का आयोजन शोध में गुणवत्ता लाने के उद्देश्य से किया जा रहा है। प्रतिभागियों को सैद्धांतिक ज्ञान के साथ ही अभ्यास आधारित सत्रों के माध्यम से डेटा विश्लेषण के सरल और संपूर्ण तरीकों से परिचित कराना है, ताकि वे अपने संबंधित विषय में शोध करने में आत्मविश्वास और विशेषज्ञता हासिल कर सकें। इसके साथ ही उन्होंने बताया की पुरे वैश्विक स्तर रिसर्च पब्लिकेशन प्रकाशन शीर्ष 10% बढ़ रहा है जो वैश्विक रूप से 4% के रूप में बहुत अधिक है जिसमें दुनिया भर में वैश्विक शोध प्रकाशन में भारत का योगदान 5% है। एवं पत्र की दर शोध पत्र की गुणवत्ता के सबसे महत्वपूर्ण संकेतकों में से एक है, इसलिए वैश्विक शोध प्रकाशन में मात्रा के अनुसार भारत का योगदान 5% है जबकि स्टेशन के अनुसार विश्वव्यापी प्रकाशन में भारत का योगदान 2.3% है।

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कार्यशाला के मुख्य अतिथि प्रो. प्रदीप कुमार सिन्हा ने कहा की पूरी दुनिया में हर एक जनरेशन के लिए रिसर्च काफी महत्वपूर्ण हैं और रिसर्च करने के लिए एवं रिसर्च में अलग-अलग तरिके से विकास करने के लिए रिसर्च मानसिकता और और उन्होंने उदहारण देते हुए बताया की एक नॉर्मल इंसान का नजरिया और रिसर्चर वाला नजरिया कैसे होता है और रिसर्चर वाला नजरिया होना कितना आवश्यक हैं दुनिया को अलग नजरिये से देखना सीखे तभी आपके रिसर्च का सही नतीजा प्राप्त होगा। हमें स्कूली शिक्षा से ही रिसर्च मानसिकता उतपन्न करनी चाहिए। उन्होंने कहा की छात्रों को अपने अंदर रिसर्च मानसिकता का विकास करना चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने कहा की रिसर्च पुब्किकेशन्स काफी महत्वपूर्ण हैं क्यूंकि पब्लिक करना आज के दौर में काफी कठिन हैं।

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कार्यशाला में दो दिनों तक विषय विशेषज्ञ प्रो. जी.पी. सिंह ने प्रतिभागियों को महत्त्वपूर्ण जानकारी प्रदान की। जिसमें उन्होंने पहले दिन वर्कशॉप की शुरुआत रिसर्च चर और परिकल्पना के बारे में बात की जिसमें परिकल्पना परीक्षण के प्रकार और आगे अशक्त परिकल्पना और वैकल्पिक परिकल्पना के बारे में बताया। परिकल्पना के परीक्षण के लिए विभिन्न परीक्षणों के बारे में बात की जेसे की जेड टेस्ट, टी टेस्ट, ची स्क्वायर टेस्ट आदि। साथ ही उन्होंने एसपीएसएस सॉफ्टवेयर के साथ हैंड्स-ऑन के बारे में बताया। इसके साथ ही दूसरे दिन उन्होंने रिसर्च मेथड्स और बेसिक स्टेटिस्टिक्स उपकरणों एवं रिसर्च के प्रत्यक प्रकारो के बारे में जानकारी दी और कहा की प्रत्यक रिसर्च महत्वपूर्ण है।

कार्यशाला के समापन सत्र में डॉ. उमेश कुमार मिश्रा, अध्यक्ष छत्तीसगढ़ निजी विश्वविद्यालय विनियामक आयोग मुख्य रूप से उपस्थित हुए। और कार्यशाला में उपस्थित सभी प्रतिभागियों को शुभकामनाएं दी। कार्यशाला के समापन में उपस्थित अतिथियों को मोमेंटो देकर धन्यवाद दिया गया।

श्री रावतपुरा सरकार लोक कल्याण ट्रस्ट के उपाध्यक्ष डॉ. जे. के. उपाध्याय, विश्वविद्यालय के प्रति-कुलाधिपति हर्ष गौतम, कुलपति प्रो एस. के. सिंह, कुलसचिव प्रभारी मनोज कुमार सिंह ने सफल दो दिवसीय कार्यशाला के लिए सभी शैक्षणिक एवं अशैक्षणिक स्टाफ को शुभकामनाएं दी…
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