May 2, 2026

होलिका दहन: ऐसा मंदिर जहां की अखंड ज्योति से जलाते हैं होलिका, माचिस की तीली का नहीं करते उपयोग…

0
Holika-Dahan-Upay

होलिका दहन बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है माना जाता है कि होलिका दहन की अग्नि में आहुति देने से जीवन की नकारात्मकता समाप्त होती है। वहीं बता दें की राजा मोरध्वज ने जिस महामाया मंदिर की स्थापना की थी, वहां होलिका दहन पर अनोखी परंपरा निभाई जाती है। मंदिर में वर्षों से प्रज्ज्वलित हो रही अखंड ज्योति से अग्नि लेकर ही होलिका दहन किया जाता है। यहां तक कि इस होलिका दहन में मचिस की तीली का उपयोग नहीं किया जाता।


join whatsapp


Read More:-श्री रावतपुरा सरकार इंटरनेशनल स्कूल के छात्रों ने BYJU’S का डिस्कवरी स्कूल सुपर लीग राउंड वन किया क्वालीफाई…

राजधानी रायपुर में महामाया मंदिर के पुजारी पंडित मनोज शुक्ला बताते हैं कि अखंड ज्योति से अग्नि लेकर होलिका दहन करने की यह परंपरा सालों से निभाई जा रही है। खास बात यह है कि मंदिर में होलिका दहन होने के बाद ही मंदिर के आसपास के इलाकों में दहन किया जाता है। होलिका दहन के बाद होलिका की अग्नि ले जाकर दूसरे जगह दहन करते हैं।



Read More:-बिलासा इंस्टीट्यूट ऑफ नर्सिंग में हुआ ‘Hasta La Vista’…

भद्रा काल-

होलिका दहन में मुहूर्त को विशेष महत्व देते है, यदि भद्रा काल हो तो दहन तब किया जाता है, जब भद्रा काल समाप्त हो जाए। इस साल आधी रात तक भद्रा है, इसलिए होलिका दहन भी आधी रात बाद ही किया जाएगा।

पूजा-

होलिका दहन से पहले प्रथम पूज्य भगवान गणेश, भगवान नृसिंह, प्रहलाद और बुआ होलिका की पूजा करके सुख समृद्धि की प्रार्थना की जाती है।इसके बाद पुजारीगण होलिका का दहन गर्भगृह में प्रज्वलित अखंड ज्योति से अग्नि लाकर जयकारे लगाते हुए होलिका दहन करते है। इसके बाद पुरानी बस्ती के लिली चौक, लोहार चौक, अमीनपारा चौक, बंधवापारा, लाखेनगर, कंकालीपारा, कुशालपुर, ब्रह्मपुरी सहित अन्य इलाकों में धूमधाम से होलिका दहन किया जाता है।

Read More:-श्री रावतपुरा सरकार इंस्टीट्यूट ऑफ नर्सिंग मंडला जीएनएम द्वितीय वर्ष परीक्षा परिणाम घोषित, सभी छात्राएं फर्स्ट डिवीजन से पास…

मंदिर परिसर में वसंत पंचमी के दिन अंडा पेड़ गाड़ा गया था। जहां यह पेड़ गाड़ते हैं, वहीं पर लकड़ियां एकत्रित करके होलिका दहन किया जाता है। यह परंपरा छत्तीसगढ़ के हर गांव में निभाई जाती है। कई जगह होलिका दहन से पूर्व अंडा पेड़ गाड़कर वहां लकड़ियां लाकर दहन किया जाएगा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *