सिंगल यूज मास्क से बना बेहतर कंक्रीट, रिसर्च में आया सामने…
कोरोना महामारी के दौरान दुनिया भर के लोगों ने सिंगल यूज मास्क का खूब इस्तेमाल किया है। जहां इस मास्क ने हमें वायरस के कणों से बचाया, वहीं इन्होंने पर्यावरण में काफी प्रदूषण भी बढ़ाया। हालांकि, वॉशिंगटन स्टेट यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने सिंगल यूज या मेडिकल मास्क से होने वाले प्रदूषण को कम करने का एक अनोखा रास्ता ढूंढ निकाला है।
मटेरियल्स लेटर्स में प्रकाशित एक रिसर्च के अनुसार, यदि सिंगल यूज मास्क को सीमेंट के मिश्रण में मिलाया जाए, तो इससे ज्यादा मजबूत और टिकाऊ कंक्रीट बनता है। रिसर्चर्स की मानें तो नॉर्मल कंक्रीट के मुकाबले मास्क कंक्रीट 47% ज्यादा मजबूत होता है। बता दें कि इस्तेमाल होने के बाद सिंगल यूज मास्क को सही तरीके से डिस्पोज न करने पर ये पर्यावरण में दशकों तक रह सकता है। वैज्ञानिकों ने बताया कि दुनिया भर में सीमेंट मिश्रण बनाने में 8% कार्बन उत्सर्जन होता है। अगर कंक्रीट को मास्क के माइक्रो फाइबर्स की मदद से बनाया जाए, तो ये कार्बन उत्सर्जन के साथ-साथ प्रोजेक्ट में सीमेंट के यूज को भी कम करेगा। इससे सीमेंट पर होने वाला खर्चा भी बचेगा।
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रिसर्च में शामिल वैज्ञानिक जियानमिंग शी कहते हैं कि सही तरीके से प्रोसेस किए जाने पर यूज हो चुके वेस्ट मास्क्स भी एक कीमती चीज बन सकते हैं। सिंगल यूज मास्क को रिसाइकिल करने की हमने केवल एक टेक्नोलॉजी बताई है। शी सिविल और एनवायरनमेंटल इंजीनियरिंग के प्रोफेसर हैं। सबसे पहले वैज्ञानिकों ने मास्क से मेटल और कॉटन की बद्धियों को हटाया। इसके बाद मास्क के कपड़े को छोटे-छोटे टुकड़ों में काटा। फिर 5 मिलीमीटर से 30 मिलीमीटर की लंबाई वाले छोटे मास्क फाइबर्स को ग्राफीन ऑक्साइड में मिलाया। यह कंक्रीट में दरारों से बचने के लिए किया गया।
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इस प्रोसेस के बाद आखिर में मास्क के फाइबर्स को सीमेंट मिश्रण में मिलाया। इससे कंक्रीट को लगभग दोगुनी मजबूती मिली। इस रिसर्च के बाद अब वैज्ञानिक पॉलिएस्टर जैसे मटेरियल्स को भी इंजीनियरिंग की मदद से रिसाइकिल करने की कोशिश कर रहे हैं।

