June 23, 2024

भूकंप के झटकों से दहल उठा जापान आखिर जापान पर क्यों आते है भूकंप बार-बार…

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बता दे कि साल के पहले ही दिन भूकंप के झटकों से जब जापान दहल उठा । तब रिक्टर स्केल पर भूकंप की तीव्रता 7.4 मापी गई, कई जगहों पर सड़कों में दरारें पड़ गईं । साथ ही मकानों को भी भारी नुकसान पहुंचा है। हजारों घरों की बिजली ठप हो गई है। इतना ही नहीं, 4.0 या उससे अधिक तीव्रता वाले भूकंप के 21 झटके महसूस किए गए । 155 भूकंपों के बाद जापान की मौसम एजेंसी ने सुनामी की चेतावनी जारी की है। एंजेंसी ने तटीय इलाकों में रहने वाले लोगों से अपील की है कि वह फिलहाल अपने घर न जाएं। करीब एक हजार लोगों ने सेना के बेस पर शरण ली है। भूंकप से तटीय इलाकों की इमारतें भी ढह गयी । होंशू के मुख्य द्वीप इशिकावा प्रान्त में आए भूकंप की तीव्रता 7.5 थी। वाजिमा बंदरगाह पर चार-चार फीट ऊंची लहरें उठ रहीं थीं।

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बड़ी सुनामी की चेतावनी जारी 

भूकंप के कारण इशिकावा प्रान्त के वाजिमा शहर में आग लग गई और 32 हजार अधिक घरों की बिजली गुल हो गई। मौसम विज्ञान एजेंसी ने शुरू में इशिकावा के लिए एक बड़ी सुनामी की चेतावनी जारी की। साथ ही होन्शू के पश्चिमी तट के बाकी हिस्सों के साथ-साथ देश के सबसे उत्तरी मुख्य द्वीप होक्काइडो के लिए निचले स्तर की सुनामी की चेतावनी या सलाह जारी की। हयाशी ने जोर देकर कहा कि लोगों के लिए तटीय क्षेत्रों से दूर जाना महत्वपूर्ण है। हर मिनट मायने रखता है। कृपया तुरंत सुरक्षित क्षेत्र में चले जाएं। कई घंटों बाद चेतावनी को नियमित सुनामी में बदल दिया गया, जिसका अर्थ है कि समुद्र अभी भी 3 मीटर (10 फीट) तक की लहरें उत्पन्न कर सकता है। 

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जापान में एक सदी पहले से ही झटकों का सिलसिला जारी  

बता दे कि करीब 21 महीने पहले (मार्च, 2022 में) फुकुशिमा तट पर भी 7.4 तीव्रता का भूकंप आया था। इस झटके से देश का पूर्वी इलाका बुरी तरह प्रभावित हुआ था। जापान में करीब 12 साल पहले आई सुनामी का मंजर आज भी सिहरन पैदा करता है। इसमें 18500 से अधिक लोगों की मौत हुई थी। 2011 में पूर्वोत्तर जापान में समुद्र के नीचे 9.0 तीव्रता का भयानक भूकंप आया था। फुकुशिमा परमाणु संयंत्र के तीन रिएक्टर बंद करने पड़े थे। लगभग एक सदी पहले, 1923 में भूकंप के तगड़े झटकों के कारण राजधानी टोक्यो पूरी तरह तबाह हो गई थी।

भूकंप का केंद्र माना जाता है इशिकावा 

भूकंप का केंद्र इशिकावा के नोटो क्षेत्र में वाजिमा पूर्व-उत्तरपूर्व में 30 किलोमीटर दूर 37.5 डिग्री उत्तरी अक्षांश और 137.2 डिग्री पूर्वी देशांतर पर था । इस क्षेत्र में बड़े भूकंप आने का खतरा रहता है। मौसम एजेंसी के मुताबिक इसकी गहराई बहुत कम थी । भूकंप के कारण एक मीटर से ज्यादा ऊंची सुनामी लहरें इशिकावा प्रांत में तट तक पहुंची लेकिन वे 5 मीटर (16 फीट) से छोटी रहीं ।

क्या है वजह बार-बार भूकंप का

भूकंप किसी फाल्ट पर अचानक खिसकने से आता है। टेक्टोनिक प्लेटें हमेशा धीरे-धीरे चलती रहती हैं, लेकिन घर्षण के कारण वे अपने किनारों पर अटक जाती हैं। जब किनारे पर तनाव घर्षण पर हावी हो जाता है, तो एक भूकंप आता है जो तरंगों में ऊर्जा छोड़ता है जो पृथ्वी की परत के माध्यम से यात्रा करता है और हमें महसूस होने वाले झटकों का कारण बनता है।

रिंग ऑफ फायर

जापान रिंग ऑफ फायर पर बसा है, यह प्रशांत महासागर का इलाका है, जिसे प्रशांत रिम या पैसिफिक बेल्ट भी कहते हैं। यह वो इलाका है जहां सबसे ज्यादा भूकंप और ज्वालामुखी विस्फोट होते हैं। दुनिया भर के 75 प्रतिशत ज्वालामुखी रिंग ऑफ फायर इलाके में ही स्थित हैं । ये प्लेट्स आपस में टकराती हैं तो भूकंप आता है, सुनामी उठती है और ज्वालामुखी फटते हैं। इस रिंग ऑफ फायर का असर न्यूजीलैंड से लेकर जापान, अलास्का और उत्तर व साउथ अमेरिका तक देखा जा सकता है। दुनिया के 90% भूकंप इसी रिंग आफ फायर क्षेत्र में आते हैं।

टेक्टोनिक प्लेटों का मोज़ेक

भूकंप आने की प्रमुख वजह हैं टेक्टोनिक प्लेट । और जब ये टेक्टोनिक प्लेट आपस में टकराती हैं और एक दूसरे के नीचे खिसक जाती है – जिससे अचानक ऊर्जा का विस्फोट होता है। जापान चार प्रमुख टेक्टोनिक प्लेटों के शीर्ष पर स्थित है , जो इसे दुनिया के उन स्थानों में से एक बनाता है जहां टेक्टोनिक गतिविधि का अनुभव होने की सबसे अधिक संभावना है। इसका कारण है यहां मिलने वाली धरती की सबसे अशांत टेक्टोनिक प्लेट्स। ये प्लेटें एक अभिकेंद्रित सीमा बनाती हैं, जिसके कारण ये क्षेत्र दुनिया के सर्वाधिक भूकंपों का केन्द्र बन जाता है। यहां पर पेसिफिक प्लेट, फिलिपींस प्लेट और अमरीकी प्लेट के नीचे जा रही है।

क्या है टेक्टोनिक प्लेट्स ?

पृथ्वी के स्थलीय दृढ़ भू-खंड को प्लेट कहा जाता है तथा प्लेट के बीच के टूटे हुए भाग को टेक्टॉनिक कहा जाता है। पृथ्वी पर उपस्थित प्लेटें स्वतंत्र रूप से पृथ्वी के दुर्बलमंडल पर विभिन्न दिशाओं में संचलन करती हैं।प्लेटों को एक टूटे हुए खोल के टुकड़ों की तरह माना जा सकता है जो पृथ्वी के आवरण की गर्म, पिघली हुई चट्टान पर आराम करते हैं और एक दूसरे के खिलाफ कसकर फिट होते हैं। ग्रह के आंतरिक भाग में रेडियोधर्मी प्रक्रियाओं से निकलने वाली गर्मी प्लेटों को कभी एक-दूसरे की ओर और कभी-कभी एक-दूसरे से दूर जाने का कारण बनती है।

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