April 19, 2026

छत्तीसगढ़ : केंद्र ने रोके 182.15 करोड़ रुपये, मिड डे मिल पर संकट…

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छत्तीसगढ़ के स्कूली बच्चों के मध्याह्न भोजन पर इस साल संकट खड़ा हो सकता है। दरअसल, राज्य सरकार ने केंद्र सरकार की ओर से प्रधानमंत्री पोषण शक्ति निर्माण योजना के तहत मिली राशि का पिछले साल हिसाब नहीं दिया था। इसके चलते केंद्र ने 182.15 करोड़ रुपये रोक दिया है। केंद्र से दो टूक कहा है कि जब तक पिछला हिसाब नहीं मिलेगा, इस साल का केंद्रांश भी नहीं भेजा जाएगा। विभागीय अधिकारियों के मुताबिक पिछले वर्ष राज्य के बजट से राशि यह सोचकर खर्च कर दी गई कि केंद्रांश आएगा तो उसे समायोजित कर लिया जाएगा, लेकिन अब मामला फंस गया है। इधर, 16 जून से स्कूल भी खुलने हैं।

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दरअसल, अग्रिम राशि जारी करने के लिए राज्य सरकार से अनुमति का इंतजार हो रहा है। कई विकासखंडों में मार्च-अप्रैल 2022 की राशि का भुगतान नहीं हो पाया है। स्कूल शिक्षा विभाग ने शिक्षा मंत्रालय के सचिव को पत्र लिखकर जानकारी दी है कि केंद्र के पीएफएमएस (पब्लिक फाइनेंस मैनेजमेंट सिस्टम) पोर्टल पर मार्च 2022 के अंतिम 15 दिनों में सही संचालन नहीं होने और तकनीकी खामी के कारण अधिकांश विकासखंडों में देयकों का भुगतान नहीं हो पाया है। पीएफएमएस पोर्टल और राज्य के कोषालय का साफ्टवेयर ठीक से लिंक नहीं होने के कारण यह संकट खड़ा हो गया है। बता दें कि केंद्रांश से 355 करोड़ और राज्यांश से 269 करोड़ रुपये मिलता है। राज्य से अधिक राशि खर्च करके कार्यक्रम चलाया गया है, जबकि केंद्र से 182.15 करोड़ रुपये आना बाकी है।


 

अधिकारियों  के मुताबिक कोरोना संक्रमण के चलते प्रदेश के सभी स्कूलों को 13 मार्च 2020 को बंद कर दिया गया था। इसके बाद बच्चों को सूखा राशन बांटा गया था। इसमें चावल, दाल, तेल, सोयाबड़ी, अचार, नमक आदि शामिल  था। इस साल सरकार ने बच्चों के लिए खाने-पीने की चीजें रूरल इंडस्ट्रियल पार्क (ग्रामीण औद्योगिक पार्क) से खरीदने का निर्णय लिया है। इसके लिए प्रदेश के 43 हजार स्व-सहायता समूह की मैपिंग कराई गई है।


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इस योजना के तहत प्रदेश के सरकारी, अनुदान प्राप्त और निजी स्कूलों में पहली से आठवीं तक के 30 लाख बच्चों को पका हुआ गरम पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराया जाता है। इसके कारण पिछले वर्षों में स्कूलों में बच्चों के शाला त्यागने की दर में कमी आई है। साथ ही कुपोषण भी कम हुआ है। प्रदेश के 146 विकासखंडों में 31 हजार 587 प्राइमरी और 13 हजार 711 मिडिल स्कूलों के बच्चों को इस योजना का लाभ मिलता है।


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