June 5, 2026

उज्जैन में पहली ग्रीनविच प्रणाली की वैदिक घड़ी का होगा लोकार्पण, जानिए क्या है इसमें खास…

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उज्जैन : मध्यप्रदेश के उज्जैन में देश-दुनिया की पहली वैदिक घड़ी लग रही है । यहां चारों दिशाओं में चार घड़ियां लगेंगी। खास बात यह है कि उज्जैन की इस वैदिक घड़ी का समय, शुभ मुहूर्त और पर्व आदि आप अपने मोबाइल पर भी देख सकेंगे। वैदिक घड़ी की रीडिंग के लिए एक मोबाइल ऐप की योजना भी है। इससे नागरिक स्मार्टफोन, कंप्यूटर, टेलीविजन और अन्य संबंधित उपकरणों पर उपयोग कर सकेंगे। वैदिक घड़ी के बैकग्राउंड ग्राफिक्स में ज्योतिर्लिंग, नवग्रह आदि को दर्शाने की भी योजना है।

क्या है वैदिक घड़ी ?

वैदिक घड़ी में समय के साथ लग्न, ग्रहण, मुहूर्त और पर्व की जानकारी हासिल की जा सकती है। मौजूदा ग्रीनविच पद्धति के 24 घंटों को 30 मुहूर्त (घटी) में विभाजित किया गया है। समय को पल और घटी में बांटा गया है। वैदिक घड़ी में मौजूदा ग्रीनविच पद्धति की घंटे, मिनट, सेकंड वाली घड़ी भी रहेगी। प्राचीन भारत में काल गणना अत्यंत शुद्ध पद्धति से की जाती थी। उज्जैन में समय-समय पर कई खगोलशास्त्र के विद्वान हुए, जो समय, घड़ी, नक्षत्रों और तिथियों की एकदम सटीक गणना किया करते थे। शासकीय जीवाजी वेधशाला में वर्तमान में जो यंत्र लगे हैं, उनसे सूर्य की पल-पल की स्थिति, समय और सूर्योदय तथा सूर्यास्त के समय की बिल्कुल सटीक जानकारी प्राप्त होती है। हिंदू टाइमकीपिंग और ग्रीनविच प्रणाली के अनुसार समय प्रदर्शित करने वाली दुनिया की पहली वैदिक घड़ी उज्जैन में स्थापित हो रही है।

1 मार्च को होगा उद्घाटन

उज्जैन के जंतर-मंतर पर लगने वाली इस वैदिक घड़ी का वर्चुअली उद्घाटन 1 मार्च को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी करेंगे। इस घड़ी को उज्जैन आने वाले पर्यटक और श्रद्धालु भी देख सकेंगे। उज्जैन में पंचांग और कैलेंडर विक्रम संवत के नाम से दुनिया भर में प्रकाशित होते हैं। कर्क रेखा भी यहीं से गुजरती है और यह मंगल ग्रह का जन्म स्थान भी है। ऐसे में इस स्थान का महत्व और भी बढ़ जाता है। उज्जैन में जंतर-मंतर के भव्य टॉवर में दुनिया की पहली अनोखी घड़ी के लिए जंतर-मंतर पर भव्य टॉवर बन कर तैयार है। इसे विक्रम संवत एप के जरिए से चलाया जाऐगा। जिसे जीवाजी वेधशाला में तैयार किया जा रहा। साइज़ लगभग 10 x 12 फीट है। यह घड़ी 30 मुहूर्त के समय बताने वाली दुनिया की पहली वैदिक घड़ी होगी।

कितनी है घड़ी की लागत ?

विक्रम शोध पीठ उज्जैन के निदेशक ने बताया कि दुनिया की पहली वैदिक घड़ी बनाने में 1 करोड़ 62 लाख की लागत आई है। उज्जैन में महाकाल के दर्शन करने वाले श्रद्धालु जंतर-मंतर पर भी इस अनोखी घड़ी को देख सकते हैं। इसके अलावा एक कनेक्टेड एंड्रॉइड एप्लिकेशन भी है। ऐप के जरिए आम लोग भी इसका इस्तेमाल कर सकेंगे। इस घड़ी की खासियत यह है कि इसमें सूर्योदय से सूर्यास्त तक की जानकारी के साथ विक्रम पंचांग और ग्रहों के विवरण योग, भद्रा, चंद्रमा की स्थिति, राशि, चक्र राशि, चौघड़िया, सूर्य ग्रहण और चंद्र ग्रहण शामिल हैं। इस घड़ी को स्थापित करने का उद्देश्य भारतीय कालगणना को पुनः स्थापित करना है। वैदिक घड़ी के लिए 60 फीट ऊंचा सात मंजिला टावर तैयार किया जा रहा।

ग्रीनविच मीन टाइम का अभिप्राय उस समय से है, जो ग्रेट ब्रिटेन का मानक समय है। इंग्लैंण्ड के निकट शून्य देशान्तर पर स्थित ‘ग्रीनविच’ नामक स्थान से गुजरने वाली काल्पनिक रेखा को ‘प्राइम मैरिडियन’ या ‘शून्य देशान्तर’ कहते हैं। इसी देशान्तर रेखा के समय को सभी देश मानक समय मानते हैं।

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