मन, शरीर एवं आत्मा के लिए योग है आवश्यक : प्रो जीडी शर्मा

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रायपुर। आज कई लोगों के पास पैसा है पर वे स्वस्थ नहीं हैं। वे कई मानसिक और शारीरिक परेशानियों का सामना कर रहे हैं। योग इन परेशानियों को दूर करने में सक्षम है। योग शरीर, मन और आत्मा के लिए आवश्यक है। उत्तम स्वास्थ्य के लिए योग का सहारा लेना बहुत जरूरी है। उक्त विचार एसोसिएशन ऑफ इंडियन यूनिवर्सिटीज(एआईयू) नई दिल्ली के चेयरमैन प्रो. जीडी शर्मा ने व्यक्त की । बुधवार को श्री रावतपुरा सरकार विश्वविद्यालय में ‘योगा वेंचर : इम्बार्किंग द जर्नी ऑफ बाॅडी, माइंड एंड साॅल’ विषय पर आयोजित तीन दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय सेमीनार के उद्घाटन सत्र में बतौर मुख्य अतिथि बोल रहे थे।

योग भारत का सबसे पुराना स्वास्थ्य अभ्यास

इंटर यूनिवर्सिटी सेंटर फॉर योगिक साइंस, बेंगलुरु के सौजन्य से एसआरयू कला संकाय के योग विभाग द्वारा आयोजित इस सेमीनार में प्रो शर्मा ने अपने उद्बोधन में आगे कहा कि योग भारत का सबसे पुराना स्वास्थ्य अभ्यास है। स्वास्थ्य के लिए उपयोगी होने के कारण आज विश्व के 192 देशों ने योग को अपनाया है। संयुक्त राष्ट्र संघ ने विश्व योगा दिवस मनाने की शुरूआत की है। यूनिवर्सिटी के कुलपति डाॅ. एसके सिंह ने कहा कि रावतपुरा विवि मॉडर्न के साथ ट्रेडिशनल एजुकेशन के लिए प्रतिबद्ध है। यहां के विद्यार्थियों को कला, विज्ञान, धर्म, आध्यात्म व सेवा की शिक्षा एकेडमिक पाठ्यक्रम के साथ-साथ दी जा रही है।


योग से आत्मा को मिलती है पोषण

विवि के पूर्व प्रो चांसलर राजीव माथुर ने कहा कि विश्व में योगा को मान्यता मिलना भारत के सांस्कृतिक अभ्युदय का प्रमाण है। आज योग को दर्शन, खेल और उपचार के रूप में मान्यता मिल गई है। योग किसी भी परिस्थितियों को सामना करने की ताकत देता है। यह योग व्यक्ति को सफलता और असफलता में समान रखता है। योग शरीर को मन से, मन को आत्मा से और आत्मा को परमात्मा से मिलाता है। आज वही व्यक्ति स्वस्थ है जो मन, इंद्रियों और आत्मा से प्रसन्न है। छत्तीसगढ़ योग आयोग के सचिव एएम एल पाडेंय ने कहा कि योग शारीरिक व्यायाम से परे है। जीवन में तनाव कम करने और मन में शांति स्थापित करने के लिए योग जरूरी है। योग से आत्मा को पोषण मिलती है।

योग भारत की सबसे शुरूआती बौद्धिक ज्ञान है

भगवंत सिंह ने कहा कि योग जीवन के लिए महत्वपूर्ण ही नहीं बल्कि आधार है। यह एक सामान्य व्यायाम नहीं है बल्कि एक जीवनशैली है। योग के सहारे भारत के विश्वगुरू बनने की नींव पड़ चुकी है। सेमीनार के संयोजक डाॅ. कप्तान सिंह ने अपने स्वागत उद्बोधन में कहा कि योग भारत सबसे शुरूआती बौद्धिक ज्ञान है। यह मानसिक के साथ शारीरिक स्वास्थ्य के लिए जरूरी है। कार्यक्रम का संचालन अंजना प्रसाद ने की।

साथ ही कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए कुलसचिव डाॅ. सौरभ कुमार शर्मा ने आभार व्यक्त किया। सेमीनार में तीन दिनों (21 से 23 फरवरी) सौ से अधिक शोध पत्रों का ऑनलाइन-ऑफलाइन वाचन किया जाएगा। प्रथम दिन के तकनीकी सत्र को अमरीकी इंस्टीट्यूट ऑफ एडवांस साइंस के प्रो. बलराम सिंह ने वर्चुअल माध्यम से संबोधित किया। कार्यक्रम में प्रो. आरएल बिराली, डाॅ मनीष वर्मा, डाॅ केवल राम चक्रधारी, डाॅ. नम्रता चौहान, डाॅ. राधिका चंद्राकर सहित अन्य उपस्थित रहे।

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