NASA : 50 साल पहले चंद्रमा से आए नमूनों में कुछ राज, क्या अब भी छिपे हैं…
50 साल पहले चंद्रमा से लाए गए चट्टान के नमूने का अध्ययन नासा फिर से कर रहा है अपोलो-17 अभियान, जो 1972 में चंद्रमा पर गया था और पिछले सदी का अंतिम मानव चंद्र अभियान साबित हुआ था, पृथ्वी की प्राकृतिक उपग्रह से लाये गये इन अभियानों के आखिरी नमूने का अध्ययन किया जा रहा है। इस नए अध्ययन से चंद्रमा की आकृति और भूगर्भीय जानकारी मिलने की संभावना है जो पिछले अध्ययन में नहीं मिल सकी थी। यह अध्ययन नासा के आगामी आर्टिमिस अभियान के लिए कर रहा है।
रोचक बात यह है कि आखिर नासा को 50 साल बाद इन नमूनों के अध्ययन की क्यों सूझी। इसका जवाब यही है कि नासा अपने महत्वाकांक्षी आर्टिमिस अभियान के लिए कई ऐसे सवालों के जवाब चाहता है जो शायद अभी तक इस तरह के नमूनों के अध्ययन के दौरान खोजे नहीं गए थे। आर्टिमिस अभियान में लंबे समय तक चंद्रमा पर अगले पुरुष और पहली महिला को भेजने की तैयारी है।
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यह नमूना 1072 से ही नासा के होस्टन स्थित जॉनसन स्पेस सेंटर के फ्रीजर में सुरक्षित रखे हुए हैं। नासा ने अपने बयान में बताया कि यह शोध अपोलो नेक्स्ट जरनेशन सैम्पल ऐनालिसिस प्रोग्राम ANGSA का हिस्सा है जिसे नासा के चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर जाने वाले आर्टिमिस अभायन से पहले किया जा रहा है।
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बता दें की इस नमूने के अध्ययन की प्रक्रिया पहले ही शुरू हो गई थी। नासा के जूली मिशेल और उनकी आर्टिमिस क्यूरेशन टीम इस नमूने के अध्ययन की तैयारियां कर रही हैं। मिशेल ने बताया कि उनकी टीम 2018 के शुरू में इस पर काम शुरू किया था जिसके बाद उन्हें कई तरह की तकनीकी चुनौतियों का सामना करना पड़ा।

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नमूने के अध्ययन के लिए मिशेल और उनकी टीम के द्वारा तैयार की जा रही जगह भविष्य में भी चंद्रमा और अन्य जगहों से आने वाले नमूनों के अध्ययन के लिए उपयोगी होगी खुद मिशेल के शब्दों यह एक तरह से भावी ठंडे नमूनों की प्रक्रियाओं के लिए एक अभ्यास है। इसी जगह पर आर्टिमिस से आए नमूनों का अध्ययन होगा। नमूने ठंडे जमे रहें यह सुनिश्चित करने के लिए टीम ने एक बड़ा -20 डिग्री सेल्सियस तापमान वाला कमरा डिजाइन किया है।
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छोटे वाष्पशील जैविक पदार्थ- अपोलो अभियान के सैम्पल क्यूरेटर रेयान जिगलर ने एक बयान में बताया कि यह आर्टिमिस के लिए जरूरी सबक है, क्योंकि नमूनों की प्रक्रिया ठंडे में पूरी कर पाना अपोलो अभियान से ज्यादा जरूरी है. वर्तमान टीमें भी वाष्पशील जैविक यौगिकों के अध्ययन पर ध्यान केंद्रित करना चाहती हैं क्योंकि पिछले शोधों ने दर्शाया है कि कुछ नमूनों में अमीनों एसिड भी पाए गए हैं जो पृथ्वी पर जीवन के आवश्यक तत्व हैं।

