August 21, 2026

छत्तीसगढ़ क्लाइमेट चेंज कॉन्क्लेव में अक्षय ऊर्जा तथा बायोफ्यूल को बढ़ावा देने पर दिया गया ज़ोर…

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रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में दो दिवसीय ‘‘छत्तीसगढ़ क्लाइमेट चेंज‘‘ कॉन्क्लेव में वन और जलवायु परिवर्तन विभाग द्वारा आयोजित कॉन्क्लेव में विषय विशेषज्ञों ने जलवायु परिवर्तन को विश्व के लिए खतरा माना और प्रदेश में अक्षय ऊर्जा तथा बायोफ्यूल को बढ़ावा देने की जरूरत बताई गयी है। राज्य जलवायु परिवर्तन केंद्र के नोडल अधिकारी अरुण कुमार पांडेय ने बताया कि वन विभाग द्वारा एग्रो फॉरेस्ट्री के साथ ही जंगल से लोंगो के स्वतः विस्थापन, किसानों के कार्बन क्रेडिट और क्लाइमेट फाइनेंसिंग को लेकर योजना बनाकर कार्य किया जाएगा।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इस कार्यक्रम का उद्घाटन किया। जिसमे 15 राज्यों एवं राष्ट्रीय स्तर के कई संस्थानों के प्रतिनिधित्व के साथ यह कार्यशाला अमृत काल में हरियर छत्तीसगढ़ का मार्ग प्रशस्त करेगी। 

अलग अलग विषयों पर हुई चर्चा

छत्तीसगढ़ क्लाइमेट चेंज कॉन्क्लेव 2024 के आयोजन के दौरान 15 राज्यों और राष्ट्रीय स्तर के कई संस्थाओं के प्रतिनिधि शामिल हुए। जिसमे क्लाइमेट चेंज के बारे में विस्तार से चर्चा की गई। साथ ही बताया गया कि आखिर वर्तमान में पर्यावरण की क्या स्थिति है? बढ़ते प्रदूषण का इंसान और मौसम चक्र पर किस तरह का प्रभाव पड़ रहा है? प्रदूषण को कम करने के क्या उपाय हैं। इस तरह के विषयों पर चर्चा की गयी।  साथ ही कहा गया कि इस तरह के हो रहे परिवर्तन के लिए सबको मिलकर काम करना है। उसमें जन सहयोग की आवश्यकता होगी। जब तक सब मिलकर काम नहीं करेंगे, तब तक इस सबसे बड़ी चुनौती का समाधान नहीं हो पाएगा। सिर्फ सरकारी नहीं, जो निजी क्षेत्र हैं, विभिन्न समिति ऑर्गेनाइजेशन हैं, सबको मिलकर इस दिशा में काम करना पड़ेगा। तभी जाकर हम इस चुनौती का हल हम ढूंढ पाएंगे।

क्लाइमेट चेंज की वजह से 16 जिलों में पढ़ा सबसे ज्यादा असर

छत्तीसगढ़ में पिछले 116 सालों में वार्षिक वर्षा में भी कमी देखी गयी है । इतना ही नही पुरे प्रदेश के 16 जिलों में भी 10 से अधिक बार सूखे  की स्थिति निर्मित होते देखी गयी है । जिसमें सरगुजा, बलरामपुर, जांजगीर-चांपा, सूरजपुर, रायगढ़, कोरिया, रायपुर और महासमुंद जिलों में बारिश में गिरावट देखी गयी है । साथ ही मार्च, अप्रैल व मई के दौरान छत्तीसगढ़ के जिलों में तापमान में बढ़ोत्तरी भी देखी गयी है । जिसमे सुकमा में 36 .11 डिग्री सेल्सियस और राजनंदगांव जिले में 38 . 88  डिग्री सेल्सियस तक रहा है ।

वर्ष 1951 – 2017 के दौरान गर्मियों का अधिकतम तापमान बलरामपुर में 0.15 से लेकर गरियाबंद में 1.10 डिग्री सेल्सियस तक दर्ज किया गया है । छत्तीसगढ़ में जलवायु परिवर्तन पर निगरानी बनाये रखने के लिए डैशबोर्ड बनाया गया है । साथ ही प्रिमिटिव ट्राइब्स व वैद्यराजो से सुझाव लेकर सरकार अमल करेगी । जिसमे प्रकृति संरक्षण की दिशा में किये जा रहे प्रयासों पर चर्चा की और सुझाव मांगे गये ।

जंगल को नष्ट होने से बचाना है जरुरी

क्लाइमेट चेंज की वजह से आम जनजीवन पर प्रभाव पड़ रहा है। गर्मी बढ़ रही है। फसलें बर्बाद हो रही है। कई तरह की नई बीमारी आ रही है। इससे कई तरह की बीमारियां बढ़ रही है। कई ऐसे वायरस हैं जो पहले जंगल में होते थे, लेकिन जंगल नष्ट होने के कारण वह लोगों प्रभावित करेंगे । कोरोना काल में इसका प्रभाव हम देख चुके हैं । जंगल नष्ट होने से जो क्लाइमेट चेंज हो रहा है, उससे बड़ा खतरा हो सकता है इसलिए इससे हमें बचना है। आर्थिक विकास भी जरूरी है, लेकिन इस धरोहर को बचाना है। जंगल को बचाने की ओर ध्यान देने की बात कही गई । साथ ही इसमें सबकी सहभागिता निभाने को लेकर जोर देने को कहा गया। ताकि हर एक के प्रयास से जंगल को बचाया जा सके, ताकि क्लाइमेट सही रहे।

मुख्यमंत्री ने किया कार्यक्रम का उद्घाटन

कॉन्क्लेव का आयोजन छत्तीसगढ़ राज्य जलवायु परिवर्तन केंद्र और वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग द्वारा फाउंडेशन फॉर इकोलॉजिकल सिक्योरिटी के तकनीकी सहयोग से किया गया था। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इस कार्यक्रम का उद्घाटन किया। जिसमे कहा कि जलवायु परिवर्तन के प्रतिकूल प्रभावों के कारण अनियमित वर्षा, लंबे समय तक सूखा, चक्रवाती वर्षा, वर्षा ऋतु के समय परिवर्तन जैसी चुनौतियां पूरी दुनिया के साथ ही देश और प्रदेश के सामने भी हैं। जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने में प्रदेश की भूमिका और भविष्य की कार्य योजनाओं के लिए यह कार्यशाला बहुत उपयोगी साबित होगी।  जिसमे 15 राज्यों एवं राष्ट्रीय स्तर के कई संस्थानों के प्रतिनिधित्व के साथ यह कार्यशाला अमृत काल में हरियर छत्तीसगढ़ का मार्ग प्रशस्त करेगी।

कार्यक्रम के मुख्य बिंदु

  • आयोजन के दौरान, मुख्यमंत्री ने अनियमित वर्षा, लंबे समय तक सूखे , चक्रवाती बारिश और मौसमी बदलावों को देश और दुनिया दोनों को प्रभावित करने वाली मूर्त अभिव्यक्तियों के रूप में उद्धृत करते हुए जलवायु परिवर्तन की गंभीरता को रेखांकित किया।
  • सीएम ने प्रकृति, हरियाली और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के महत्व पर प्रकाश डालते हुए इन चुनौतियों से निपटने के लिए रणनीति बनाने के महत्व पर जोर दिया।
  • कॉन्क्लेव के दौरान, मुख्यमंत्री ने ‘जलवायु परिवर्तन पर छत्तीसगढ़ राज्य कार्य योजना’ भी लॉन्च की और बस्तर में पारंपरिक स्वास्थ्य प्रथाओं पर ‘प्राचीन बुद्धि’ नामक पुस्तक का अनावरण किया।
  • उन्होंने 2015 के पेरिस समझौते को जलवायु परिवर्तन से निपटने के वैश्विक प्रयासों में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर बताया और वैश्विक स्तर पर सहयोग जारी रखने का आग्रह किया।
  • इस सम्मेलन का उद्देश्य विशेषज्ञों, पर्यावरणविदों, नीति निर्माताओं और आदिवासी समुदायों के बीच ज्ञान के आदान-प्रदान और चर्चा को सुविधाजनक बनाना है।
  • अपने ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को कम करने और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को अनुकूलित करने के लिए की गई प्रतिज्ञा है।

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