July 22, 2026

कोरोना संकट के बीच लासा फीवर ने बढ़ाई मुसीबत, कोविड जैसे है लक्षण…

0
what-is-lassa-fever-or-lassa-virus

 

कोरोना वायरस का संकट अभी खत्म भी नहीं हुआ है इस बीच बुखार से जुड़ी एक बीमारी सामने आई है, जो तेजी से फ़ैल रह है. आने वाले समय में यह बीमारी दुनिया के लिए एक नई चुनौती खड़ी कर सकती है. लासा फीवर (Lassa Fever) नाम की इस बीमारी से नाइजीरिया में लोग तेजी से संक्रमित हो रहे हैं बात दे की इस बीच एक्सपर्ट्स का कहना है कि कोरोना महामारी के बीच लासा फीवर का प्रकोप बढ़ता है तो नाइजीरिया समेत दुनिया के अन्य देशों के लिए भी मुश्किल बढ़ सकती है.

RBI ग्रेड बी पदों पर निकली वैकेंसी, जल्द करे आवेदन…

join whatsapp

 

नाइजीरिया सेंटर फॉर डिसीज कंट्रोल के आंकड़ों के अनुसार, देश में अब तक 659 लोगों में लासा फीवर से संक्रमण की पुष्टि हुई है, जबकि इस साल 88 दिनों में लासा फीवर से 123 लोगों की मौत हो चुकी है. इसके अलावा ब्रिटेन में भी लासा फीवर के तीन मरीज मिले हैं, जिसमें से एक की मौत हो चुकी है.
विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, लासा फीवर एक्यूट वायरल हैमरेजिक फीवर होता है, जो लासा वायरस के कारण होता है. लासा का संबंध वायरसों के परिवार एरिनावायरस से है और मनुष्य आमतौर पर इसकी चपेट में अफ्रीकी मल्टीमैमेट चूहों से आते हैं. मनुष्य पर लासा फीवर का प्रभाव दो से 21 दिन तक रहता है.
WHO के अनुसार, लासा वायरस की चपेट में आने पर व्यक्ति को तेज बुखार, सिर दर्द, गले में खराश, मांसपेशी में दर्द, सीने में दर्द, डायरिया, खांसी, पेट में दर्द और जी मिचलाने जैसे लक्षण नजर आने लग जाते है. गंभीर मरीजों में चेहरे पर सूजन, फेफड़ों में पानी, मुंह और नाक से खून निकलने लगता है. इसके अलावा मरीज के ब्लड प्रेशर में भी तेजी से गिरावट आने लगती है.

लासा बुखार को लेकर सबसे बड़ी परेशानी यह है कि इसके 80 फीसदी मामले एसिम्पटोमेटिक होते हैं, जिसकी वजह से इसका पता लगाना काफी मुश्किल होता है. यूरोपीयन सेंटर फॉर डिजीज प्रिवेंशन एंड कंट्रोल के मुताबिक कुछ मरीजों को अस्पताल में भर्ती करवाना पड़ता है | उनकी बीमारी काफी गंभीर हो सकती है. लासा वायरस से पीड़ित अस्पताल में दाखिल होने वाले मरीजों में से 15 फीसदी तक की मौत हो सकती है.
एक्सपर्ट्स के अनुसार, लासा बुखार संक्रमित चूहे के मल-मूत्र के जरिए फैलता है और अगर कोई व्यक्ति चूहे के मल-मूत्र के संपर्क में आता है तो वह लासा बुखार से संक्रमित हो सकता है. इसके बाद संक्रमित व्यक्ति अन्य लोगों को भी संक्रमित कर सकता है. कुछ मामलों में संक्रमित व्यक्ति के शारीरिक में तरल पदार्थ या श्लेष्मा झिल्ली जैसे आंख, मुंह, नाक के संपर्क में आने से भी संक्रमण फैल सकता है.
लासा वायरस लासा बुखार उसी परिवार से जुड़ा है, जिससे इबोला और मार्गबर्ग वायरस है. लासा बुखार पहली बार 1969 में नाइजीरिया के लासा शहर में खोजा गया था और इसी शहर के नाम पर इस बीमारी का नाम पड़ा है. इस बीमारी का पता तब चला जब नाइजीरिया में दो नर्सों की इससे मौत हो गई थी.

Read more: छत्तीसगढ़ के हक का पानी देने ओडिशा सरकार कर रही आनाकानी, बस्तरवासियों पर जल संकट का खतरा…

एक्सपर्ट्स के मुताबिक, लक्षणों के गंभीर होने तक लासा बुखार एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में नहीं फैलता है और इसके लक्षण 1 से 3 सप्ताह बाद विकसित होते हैं. लासा बुखार के लक्षणों में थकान, सिरदर्द, कमजोरी, बुखार आदि शामिल हैं. इसके अलावा कुछ मामलों में सांस लेने में कठिनाई, चेहरे का फूलना, रक्तस्राव, सीने में दर्द, पेट में झटका या उल्टी आदि महसूस हो सकते हैं.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *