July 13, 2024

साहसी और अडिग लेखन के लिए अरुंधति रॉय को मिलेगा पेन पिंटर साहित्यिक पुरस्कार…

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लंदन। लेखन तो हर कोई करता है लेकिन साहसी और अडिग लेखन की बात करे तो लेखन की यह शैली कोई – कोई ही कर पाता है। ऐसी ही एक लेखिका है बुकर पुरस्कार विजेता अरुंधति रॉय । जिसको उनके साहसी और अडिग लेखन के लिए 2024 का पेन पिंटर साहित्यिक पुरस्कार के लिए चुना गया है। अरुंधति रॉय को यह पुरस्कार दिल्ली के उपराज्यपाल वी.के. सक्सेना द्वारा उनके खिलाफ, जून महीने में निवारक निरोध कानून ,गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए )1967 के तहत मुकदमा चलाने की मंजूरी दे देने की बाद मिली है। अरुंधति रॉय को यह पुरस्कार इसी साल अक्टूबर महीने में, लंदन, इंग्लैंड में आयोजित एक समारोह में दिया जाएगा। अरुंधति रॉय, सलामन रुश्दी, मार्गरेट एटवुड, टॉम स्टॉपर्ड, कैरोल एन डफी और मैलोरी ब्लैकमैन जैसे साहित्यिक दिग्गजों की सूची में शामिल हो गईं, जिन्होंने पहले यह पुरस्कार प्राप्त किया है।

क्या होता है पेन पिंटर पुरस्कार?

हेरोल्ड पिंटर, जो ग्रेट ब्रिटेन के नागरिक थे, को 2005 में साहित्य के लिए नोबल पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। पेन (कवि, नाटककार, संपादकों के निबंधकार, उपन्यासकार) पिंटर पुरस्कार की स्थापना 2009 में नाटककार हेरोल्ड पिंटर की स्मृति में की गई थी। साथ ही वार्षिक पेन पिंटर पुरस्कार उस लेखक को दिया जाता है जो यूनाइटेड किंगडम, आयरलैंड गणराज्य या राष्ट्रमंडल के निवासी है। यह पुरस्कार “उत्कृष्ट साहित्यिक योग्यता” रखने वाले लेखकों को दिया जाता है, जो दुनिया पर अपनी “निश्चय” दृष्टि डालते हैं।


यह पुरस्कार अंग्रेजी भाषा के उन लेखकों को दिया जाता है जिन्होंने नाटक, कविता, निबंध या कथा साहित्य में उत्कृष्ट साहित्यिक कार्य किया है। जिसके लिए अरुंधति रॉय को इस वर्ष के पुरस्कार के लिए अंग्रेजी पेन अध्यक्ष रूथ बोर्थविक, अभिनेता खालिद अब्दुल्ला और लेखक रोजर रॉबिन्सन के एक पैनल द्वारा चुना गया। पेन पिंटर की जूरी ने पर्यावरणीय गिरावट से लेकर मानवाधिकारों के हनन जैसे व्यापक मुद्दों पर तीखी टिप्पणी के लिए अरुंधति रॉय के साहित्यिक कार्यों की प्रशंसा की।

अरुंधति रॉय के बारे में

अरुंधति रॉय पहली भारतीय हैं जिन्हे प्रतिष्ठित बुकर से सम्मानित किया गया। जिन्हें अपनी कृति ‘द गॉड ऑफ स्मॉल थिंग्स’ के लिए 1997 में बुकर पुरस्कार मिला था। दूसरा उपन्यास, ‘द मिनिस्ट्री ऑफ अटमोस्ट हैप्पीनेस’ 2017 में प्रकाशित हुआ था। साथ ही उन्होंने कैपिटलिज्म: ए घोस्ट स्टोरी और द अलजेब्रा ऑफ इनफिनिट जस्टिस भी लिखी हैं। उन्होंने मानवाधिकारों के दुरुपयोग, युद्ध और पूंजीवाद के खिलाफ लिखा है। वह नरेंद्र मोदी सरकार की मुखर आलोचक हैं और उन्होंने मोदी सरकार के कार्यकाल के दौरान भारत की घटती प्रेस स्वतंत्रता के बारे में भी मुखर होकर लिखा है। उन्हें 2010 में नई दिल्ली में एक कार्यक्रम में की गई अपनी टिप्पणी के लिए अभियोजन का सामना करना पड़ सकता है जिसमें उन्होंने कहा था कि कश्मीर कभी भी भारत का अभिन्न अंग नहीं था।

ब्रिटिश लाइब्रेरी में 10 अक्टूबर को दिया जाएगा यह सम्मान

क्रांतिकारी विचारों, लेखों और मुखर आवाज़ के लिए जानी जाने वाली भारतवंशी मशहूर अंग्रेजी लेखिका अरुंधति रॉय को ब्रिटेन के पेन पिंटर पुरस्कार 2024 से सम्मानित करने की घोषणा की गई है। नोबेल पुरस्कार विजेता नाटककार हेरोल्ड पिंटर की स्मृति में 2009 में स्थापित PEN की ओर से स्थापित वार्षिक पुरस्कार 2024 भारत की मशहूर अंग्रेजी लेखिका और समाजसेविका अरुंधति रॉय को दिया जाएगा। उन्हें यह पुरस्कार 10 अक्टूबर को ब्रिटिश लाइब्रेरी में आयोज्य समारोह में प्रदान किया जाएगा। इस मौके पर वह एक संबोधन भी देंगी। उन्हें नर्मदा आंदोलन व “द गॉड ऑफ़ स्मॉल थिंग्स” किताब के लिए जाना जाता है। उन्हें सन 1997 में बुकर पुरस्कार से भी नवाजा जा चुका है।

दुनिया पर रखती है ‘अडिग, अटल’ नजर

यह पुरस्कार प्रतिवर्ष यूनाइटेड किंगडम, आयरलैंड गणराज्य या राष्ट्रमंडल में रहने वाले उत्कृष्ट साहित्यिक योग्यता वाले लेखक को प्रदान किया जाता है, जो साहित्य में हेरोल्ड पिंटर के नोबेल पुरस्कार भाषण के शब्दों में, दुनिया पर ‘अडिग, अटल’ नजर रखता है। हमारे जीवन और हमारे समाज की वास्तविक सच्चाई को परिभाषित करने के लिए एक प्रचंड बौद्धिक दृढ़ संकल्प’ को दर्शाता है। अंग्रेजी लेखिका अरुंधति रॉय को पुरस्कार मिलना साहित्यिक जगत के लिए उत्सव जैसी वेला है। रॉय को बधाई देते हुए, बोरथविक ने कहा कि लेखिका बुद्धि और सुंदरता के साथ अन्याय की तत्काल कहानियां बताती है।

एक नजर

अंग्रेजी की मशहूर लेखिका और समाजसेवी भी हैं। जिन्होंने कुछ फ़िल्मों में भी काम किया है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत उन्होंने अभिनय से की। मैसी साहब फिल्म में उन्होंने प्रमुख भूमिका निभाई। इसके अलावा कई फिल्मों के लिए पटकथाएं भी उन्होंने लिखीं। जिनमें In Which Annie Gives It Those Ones (1989), Electric Moon (1992) को खासी सराहना मिली। जब उन्हें 1997 में उपन्यास गॉड ऑफ स्माल थिंग्स के लिये बुकर पुरस्कार मिला तो साहित्य जगत का ध्यान उनकी ओर गया।

हाल ही में उनकी पुस्तक “The Doctor and the saint: The ambedkar-Gandhi Debate” पुस्तक चर्चा में है , जिसका हिन्दी अनुवाद भी “एक था डॉक्टर एक था सन्त” के नाम से प्रोफेसर रतनलाल ने किया है, अरुंधति राय ने लेखन के अलावा नर्मदा बचाओ आंदोलन समेत भारत के दूसरे जनांदोलनों में भी हिस्सा लिया है। उनकी अनूदित पुस्तकें न्याय का गणित, आहत देश, कठघरे में लोकतंत्र है। हाल ही में उनकी पुस्तक “द डॉक्टर एंड द सेंट: द अंबेडकर-गांधी डिबेट” चर्चा में है, जिसका हिन्दी अनुवाद प्रोफेसर रतनलाल ने “एक था डॉक्टर एक था सन्त” के नाम से किया है।

जीवनी

उनका जन्म 24 नवंबर, 1961 को शिलौंग में हुआ। केरल की सीरियाई ईसाई माता, मेरी रॉय व कलकत्ता निवासी बंगाली हिंदू पिता, राजीब रॉय के घर जन्म हुआ। जब वे दो वर्ष की थीं, तब उनके माता-पिता का विवाह-विच्छेद हो गया और वो अपनी माता और भाई के साथ केरल आ गईं। उनकी माता महिला अधिकार आंदोलनकारी थीं व उनके पिता चाय बाग़ान के प्रबंधक। अरुंधती ने अपने जीवन के प्रारंभिक दिन केरल में गुज़ारे। उसके बाद उन्होंने आर्किटेक्ट की पढ़ाई दिल्ली से की।

सुपर स्टार राजनीति में यक़ीन नहीं

संसदीय व्यवस्था का अंग बने साम्यवादियों और हिंसक प्रतिरोध में भरोसा रखने वाले माओवादियों की विचारधाराओं में फंसी अरुंधति स्वीकार कहती हैं कि वो गांधी की अंधभक्त नहीं हैं। उन्हीं के शब्दों में- “आख़िर गांधी एक सुपर स्टार थे। जब वे भूख-हड़ताल करते थे, तो वह भूख-हड़ताल पर बैठे सुपर स्टार थे। लेकिन मैं सुपरस्टार राजनीति में यक़ीन नहीं करती, यदि किसी झुग्गी की जनता भूख-हड़ताल करती है तो कोई इसकी परवाह नहीं करता।” कई स्थानीय-अंतरराष्ट्रीय मुद्दों के ख़िलाफ़ आवाज़ बुलंद करती रही हैं, लेकिन अब उनका मानना है कि कम से कम भारत में अहिंसक विरोध प्रदर्शनों और नागरिक अवज्ञा आंदोलनों से बात नहीं बन रही है।

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