31 दिसंबर को होगा लोक शांति के लिए 108 रामार्चा महायज्ञ…
धाम। रावतपुरा धाम में 31 दिसंबर को 108 रामार्चा महायज्ञ का आयोजन होने जा रहा है। इस महायज्ञ के माध्यम से जन कल्याण के लिए ईश्वर से प्रार्थना की जाएगी, ऐसा मानते हैं की साधू संतों ने ही लोक शांति के लिए यज्ञ की परंपरा को बनाया था।श्री रामार्चा अनुष्ठान वैदिक सभ्यता के सोलह संस्कारों के साथ होता है।
राम रामेति रामेति रमे रामे मनोरमे।
सहस्रनाम तत्तुल्यं रामनाम वरानने॥

रामार्चा यज्ञ में भगवान श्री राम के चार अवतारों की पूजा होती है और पौराणिक मान्यता है कि सभी धार्मिक अनुष्ठानों में श्री रामार्चा श्रेष्ठ अनुष्ठान है इस महायज्ञ में सम्मिलित होने से मनुष्य को मोक्ष प्राप्त होता है और मनुष्य जन्म मृत्यु के फेर से मुक्त हो जाता है।
यज्ञ करने की विधि
रामार्चा पूजन में चावल, कुमकुम, दीपक, तेल, रूई, धूपबत्ती, फूल, अष्टगंध वेदी पर रखे जाते हैं. इसके बाद देव मूर्ति के स्नान के लिए तांबे के पात्र, कलश, दूध, देव मूर्ति को अर्पित किए जाने वाले वस्त्र और आभूषण चढ़ाए जाते हैं. साथ ही वो सभी सामग्रियां जो विग्रह मूर्ति पूजा के लिए ज़रूरी हों वो शामिल की जाती हैं. अवध और मिथिला क्षेत्र में ये सोलह संस्कार में भी होता है और जनकपुर में ये विवाह से पहले जनेऊ संस्कार के पहले भी कराया जाता है. अगर इसमें विग्रह पूजा की अन्य विधाए भी शामिल होगी तो इसकी समयावधि बढ़ भी जाती है.

यज्ञ परमपूज्य महाराज श्री के हाथों द्वारा संपूर्ण होगा इस यज्ञ में अन्य अतिथि भी आहुति देने के लिए पधारेंगे।
