“Breast Cancer Awareness: क्यों बढ़ रहे हैं मामले और कैसे बचें?”
रायपुर। आज के समय में किसी भी छोटी – सी चीज को नजरंदाज करना कितना घातक हो सकता है यह तो समझ आ ही रहा है कि कब छोटी सी गांठ भी एक कैंसर का रूप ले लेती है पता ही नही चल पाता है। इसी में एक कैंसर आता है स्तन कैंसर यह तब होता है जब स्तन की कोशिकाएँ अनियंत्रित रूप से बढ़ने लगती हैं और ट्यूमर का निर्माण करती हैं। ये ट्यूमर स्तन में सामान्य ऊतक को नुकसान पहुंचा सकते हैं और अगर समय रहते इलाज न किया जाए तो शरीर के अन्य हिस्सों (जैसे हड्डियाँ, लीवर, फेफड़े) में फैल सकते हैं।

इसके मामले महिलाओं में सबसे अधिक देखने को मिलता है, लेकिन पुरुषों में भी कभी-कभी पाया जा सकता है। शुरुआत में लक्षण दिखाई नहीं देते, इसलिए नियमित जांच और स्क्रीनिंग बहुत जरूरी है। शुरुआती पहचान से इलाज की सफलता बढ़ जाती है। स्तन कैंसर एक ऐसा रोग है जिसमें स्तन की कोशिकाएँ असामान्य रूप से बढ़कर गांठ बनाती हैं, और समय पर पहचान व इलाज से इसे नियंत्रित किया जा सकता हैं।
लक्षण
स्तन कैंसर के शुरुआती संकेतों में शामिल हैं:
- स्तन या ब्रेस्ट में गांठ (lump)
- स्तन का आकार या मोटाई में बदलाव
- निपल (nipple) से असामान्य स्राव या खून
- त्वचा पर बदलाव – लालिमा, गड्ढे या छाले
- ब्रेस्ट में दर्द या संवेदनशीलता
- बगल (armpit) में सूजन या गांठ
इसके कारण में शामिल है यह चीजें
- 40+ उम्र की महिलाओं में इसका ज्यादा जोखिम रहता है,
- परिवार में यदि किसी को स्तन कैंसर रहा है तो कभी कभी जेनेटिक्स भी होता है।
- हार्मोनल बदलाव: जैसे देर से बच्चे पैदा करना, गर्भनिरोधक दवा
- लाइफस्टाइल : मोटापा, शराब, धूम्रपान, कम शारीरिक गतिविधि
- डेंस ब्रैस्ट : घनी स्तन ऊतक भी जोखिम बढ़ा सकते हैं
इसके लिए निदान यह हो सकता है
- डॉक्टर द्वारा जांच करके
- मम्मोग्राफी – X-ray जांच करके
- अल्ट्रासाउंड – घनी स्तन या मम्मोग्राफी में अस्पष्टता
- MRI – उच्च जोखिम वाले मरीजों के लिए
- बायोप्सी – गांठ से नमूना लेकर जांच
सर्जरी क्यों जरुरी है ?
ट्यूमर (कैंसर वाली कोशिकाएँ) और आसपास का प्रभावित ऊतक को सर्जरी के माध्यम से निकालकर इसके जोखिम को कम किया जाता है। जिससे कैंसर को नियंत्रित करके, बढ़ने से रोका जाता है।
प्रकार
लुम्पेक्टोमी (ब्रेस्ट-सेविंग सर्जरी)
केवल ट्यूमर और उसके आसपास का छोटा ऊतक हटाया जाता है।
स्तन का अधिकांश हिस्सा सुरक्षित रहता है।
मास्टेेक्टोमी (स्तन निकालना)
स्तन के पूरे ऊतक को हटा दिया जाता है।
आवश्यक होने पर स्तन पुनर्निर्माण भी किया जा सकता है।
सेंटिनल लिम्फ नोड बायोप्सी
यह जांच करती है कि कैंसर लिम्फ नोड्स तक फैला है या नहीं।
सर्जरी के बाद: कभी-कभी रेडिएशन या कीमोथेरेपी की जरूरत पड़ती है ताकि बची हुई कैंसर कोशिकाएँ खत्म हो जाएँ।
कीमोथेरेपी
- दवाओं के माध्यम से पूरे शरीर में फैली कैंसर कोशिकाओं को मारना।
- ट्यूमर को छोटा करना ताकि सर्जरी आसान हो सके।
- कैंसर के फैलाव (Metastasis) को रोकना।

दवाएं इंफ्यूज़न (IV drip) या टैबलेट के रूप में दी जा सकती हैं।
आमतौर पर कई साइकिलों (Cycles) में दी जाती हैं।
दुष्प्रभाव:
- बाल झड़ना
- उल्टी, मतली
- थकान और कमजोरी
- इम्यून सिस्टम कमजोर होना
रेडिएशन थेरेपी
ट्यूमर को उच्च-ऊर्जा किरणों (X-rays या Gamma rays) से नष्ट करना।
सर्जरी के बाद बची हुई कैंसर कोशिकाओं को खत्म करना।
आमतौर पर 5–6 सप्ताह तक रोज़ाना छोटे सत्र।
केवल प्रभावित स्तन या क्षेत्र पर रेडिएशन दिया जाता है।
दुष्प्रभाव:
त्वचा पर लालिमा या जलन
थकान
कभी-कभी आसपास की ऊतक में सूजन
हार्मोनल थेरेपी
यदि ट्यूमर हार्मोन-रिसेप्टर पॉज़िटिव (Estrogen / Progesterone receptor) हो, तो हार्मोन को ब्लॉक करना।
ट्यूमर की वृद्धि को धीमा करना और दोबारा होने का खतरा कम करना।
दुष्प्रभाव:
मृदु गर्मी के झोंके
जोड़ों में दर्द
थकान
कभी-कभी हड्डियों की कमजोरी
इम्यूनोथेरेपी
ट्यूमर की विशेष कोशिकाओं को सीधे निशाना बनाकर नष्ट करना, स्वस्थ कोशिकाओं को कम नुकसान।
शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को सक्रिय करना ताकि यह कैंसर कोशिकाओं से लड़ सके।
लाभ:
कम सामान्य साइड-इफेक्ट्स
विशेष ट्यूमर प्रकार में अधिक प्रभावी
स्तन कैंसर का उपचार अक्सर कई तरीकों का संयोजन होता है — सर्जरी + कीमोथेरेपी + रेडिएशन + हार्मोनल/Targeted therapy।
सही उपचार योजना कैंसर के प्रकार, स्टेज, मरीज की उम्र और स्वास्थ्य पर निर्भर करती है।
समय पर पहचान और उपचार सफलता दर को बहुत बढ़ा देता है।
उपाय
संतुलित आहार और पोषण
फल, सब्ज़ियाँ और साबुत अनाज शामिल करें।
वसा कम करें, विशेषकर ट्रांस फैट और प्रोसेस्ड फूड।
अल्कोहल से बचें – शराब का सेवन स्तन कैंसर का जोखिम बढ़ा सकता है।
फाइबर युक्त आहार – पेट और हार्मोन संबंधी संतुलन बनाए रखता है।
शारीरिक गतिविधि और व्यायाम
रोजाना कम से कम 30 मिनट की हल्की-तेज़ वॉक, योग या व्यायाम।
नियमित व्यायाम हार्मोन स्तर संतुलित रखता है और मोटापा कम करता है।
एक्टिव रहना immune system को मजबूत करता है।
मोटापा नियंत्रित रखना
Overweight / Obesity स्तन कैंसर का प्रमुख जोखिम है, खासकर पोस्ट-मेंपोज़ल महिलाओं में।
शरीर का BMI (Body Mass Index) सामान्य सीमा में रखना चाहिए।
हाई रिस्क महिलाओं के लिए जेनेटिक टेस्टिंग
परिवार में स्तन कैंसर का इतिहास (Mother, Sister, Aunt) हो तो BRCA1 / BRCA2 gene testing।
यदि जीन पॉज़िटिव मिले, तो डॉक्टर preventive measures जैसे नियमित स्क्रीनिंग या प्रोफिलैक्टिक सर्जरी की सलाह दे सकते हैं।
हार्मोनल फैक्टर्स का ध्यान
लंबे समय तक हार्मोन एक्सपोज़र से जोखिम बढ़ सकता है।
अगर संभव हो तो बच्चों को स्तनपान कराएं – यह स्तन कैंसर के जोखिम को कम करता है।
लाइफस्टाइल फैक्टर्स
धूम्रपान और शराब से दूरी
पर्यावरणीय कारकों से बचाव – जैसे कीमोथैलिक हानिकारक रसायनों से कम संपर्क।
नींद पूरी करें – पर्याप्त नींद हार्मोन संतुलन बनाए रखती है।
मानसिक स्वास्थ्य
तनाव और नींद की कमी हार्मोन असंतुलन पैदा कर सकती है।
योग, मेडिटेशन, ध्यान (Mindfulness) और सामाजिक संपर्क मददगार।
टीकाकरण
किसी-किसी शोध में HPV और अन्य वायरस से कैंसर के संभावित लिंक दिखाए गए हैं।
नियमित स्वास्थ्य जाँच, ब्लड टेस्ट और अन्य preventive screenings कराते रहें।
