छत्तीसगढ़ में बिजली की खपत बढ़ी, पर उत्पादन घटा….
छत्तीसगढ़ देश का पावर हब कहलाता है लेकिन अभी गर्मी की शुरुआत हुई भी नहीं और राज्य बिजली की संकट से जूझ रहा है। बता दें की बिजली कटौती वाले देश के पांच राज्यों में छत्तीसगढ़ भी शामिल हो गया है। यह जानकारी दो दिन पहले राज्यसभा में केंद्रीय ऊर्जा मंत्री आरके सिंह ने दी थी। उनके मुताबिक चालू वित्तीय वर्ष में अक्टूबर तक राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों में 539.40 और शहरों में 50.45 घंटे औसत कटौती हुई है। केंद्र सरकार की इस रिपोर्ट को लेकर प्रदेश में सियासत तेज हो गई है। वजह यह है कि वर्ष 2008 से प्रदेश को जीरो पावर कट स्टेट का दर्जा हासिल था।
बिजली कटौती वाले टाप पांच राज्यों में छत्तीसगढ़ भी-
केंद्रीय ऊर्जा मंत्री की तरफ से राज्यसभा में दी गई जानकारी में बताया गया है कि प्रदेश शहरी क्षेत्रों में वर्ष 2018-19 में 85.17, 2019-20 में 6.10 और 2020-21 में 6.08 घंटे कटौती हुई है। कटौती के मामले में प्रदेश देश में पांचवें स्थान पर है। पहले चार स्थानों पर क्रमश: आंध्रप्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, आसाम और बिहार शामिल।

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इधर, बिजली विभाग के अधिकारियों के अनुसार राज्य बनने के बाद से प्रदेश में सभी श्रेणी के बिजली उपभोक्ताओं की संख्या में तेजी से वृद्धि हुई है। लेकिन बीते 10 साल से अधिक समय से कोई भी नया सरकारी बिजली संयंत्र नहीं लगा है। इस बीच पिछले साल नेशनल ग्रीन ड्रिब्यूनल (एनजीटी) के निर्देश पर 240 मेगावाट का संयंत्र बंद करना पड़ा है। इससे राज्य में बिजली संयंत्रों की स्थापित क्षमता 3,424 से घटकर 2,984 मेगावाट रह गई है। इस संकट के बीच एक और संयंत्र को बंद करने की तैयारी चल रही है।
राज्य स्थापना के समय नवंबर 2000 में यहां बिजली की खपत प्रति व्यक्ति औसत तीन सौ यूनिट थी। अब यह बढ़कर 2,500 यूनिट तक पहुंच गई है। इसी तरह प्रदेश में बिजली की मांग 48 सौ मेगावाट के पार पहुंच जा रही है।
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प्रदेश में बिजली की मांग की आपूर्ति का सबसे पहला जरिया राज्य के उत्पादन संयंत्र हैं। इनके अलावा सभी केंद्रीय संयंत्रों से बिजली मिलती है। इसके लिए केंद्र सरकार ने सभी राज्यों का कोटा तय कर रखा है। इसके बाद आवश्यकता पड़ने पर वितरण कंपनियां निजी या सरकारी सेक्टर से बिजली खरीदती हैं।

