July 23, 2024

COP28 : कांफ्रेंस ऑफ़ पार्टीज जलवायु परिवर्तन का हुआ महासम्मेलन… 

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कांफ्रेंस ऑफ़ पार्टीज(COP28) जलवायु परिवर्तन का महासम्मेलन संयुक्त अरब अमीरात दुबई ने वर्ष 2023 में अबूधाबी में ‘संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन फ्रेमवर्क सम्मेलन’  के कोप-28 की मेज़बानी की है। कोप26 को वर्ष 2020 में स्थगित कर दिया गया जो नवंबर 2021 में ब्रिटेन के ग्लासगो में हुआ ।  31 अक्तूबर से 12 नवंबर तक हुए इस आयोजन में कोप 26 संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन सम्मेलन की मेज़बानी यूनाइटेड किंगडम द्वारा की गयी थी।
वर्ष 1992 में पर्यावरण और विकास पर संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन में ‘संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन फ्रेमवर्क सम्मेलन’ पर हस्ताक्षर किये गए, जिसे पृथ्वी शिखर सम्मेलन, रियो शिखर सम्मेलन या रियो सम्मेलन के रूप में भी जाना जाता है। 21 मार्च, 1994 से UNFCCC लागू हुआ और 197 देशों द्वारा इसकी पुष्टि की गई।

COP 28 का उद्देश्य

2030 से पहले ऊर्जा परिवर्तन पर तेजी से नज़र रखना और उत्सर्जन में कटौती करना; पुराने वादों को पूरा करके और वित्त पर एक नए समझौते की रूपरेखा तैयार करके, जलवायु वित्त को बदलना; प्रकृति, लोगों, जीवन और आजीविका को जलवायु कार्रवाई के केंद्र में रखना ।वातावरण में ग्रीनहाउस गैसों की सांद्रता को एक स्तर पर स्थिर करना जिससे एक समय-सीमा के भीतर खतरनाक नतीजों को रोका जा सके ताकि पारिस्थितिक तंत्र को स्वाभाविक रूप से अनुकूलित कर सतत् विकास के लक्ष्यों को प्राप्त किया जा सके।
व्यापारिक नेता, युवा लोग, जलवायु वैज्ञानिक, स्वदेशी लोग, पत्रकार और विभिन्न अन्य विशेषज्ञ और हितधारक भी प्रतिभागियों में शामिल हैं। कोप 28 का मतलब UNFCCC में पार्टियों के सम्मेलन की 28 वीं बैठक है ।  संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन सम्मेलन का विस्तार करना इसका उद्देश्य है । जलवायु परिवर्तन से निपटने में विकासशील देशों की सहायता हेतु सरकारों द्वारा एक व्यापक पैकेज प्रस्तुत किया गया। हरित जलवायु कोष, प्रौद्योगिकी तंत्र और कैनकन अनुकूलन ढांँचे की स्थापना की गई।


कांफ्रेंस ऑफ़ पार्टीज के हुये सम्मेलन

कोप28 जलवायु वार्ता कमजोर देशों को जलवायु प्रभावों से होने वाले गंभीर नुकसान और क्षति से निपटने के लिए एक नए फंड के साथ शुरू हुई और जलवायु परिवर्तन के मुख्य चालक जीवाश्म ईंधन से निपटने के लिए पहले अंतरराष्ट्रीय समझौते के साथ संपन्न हुई।
वर्ष  1995: कोप1 (बर्लिन, जर्मनी )
वर्ष 1997: कोप 3 (क्योटो प्रोटोकॉल)
यह काननूी विकसित देशों को उत्सर्जन में कमी के लिए  हेतु बताता है।
वर्ष 2002: कोप 8 (नई दिल्ली, भारत) दिल्ली घोषणा
सबसे गरीब देशों की विकास, आवश्यकता और जलवायु परिवर्तन को कम करने हेतु प्रोद्योगिकी हस्तांतरण की
आवश्यकता पर ध्यान विकसित करता है।
वर्ष 2007: कोप 13 (बाली, इंडोनेिशया)
पार्टियों ने बाली रोडमैप और बाली कार्य योजना पर सहमित व्यक्त की,जिसने वर्ष  2012 के बाद के परिणाम की
ओर तीव्रता प्रदान की। इस योजना में पाँच मुख्य सारणी- साझा दिृट, शमन, अनकुूलन, प्रौध्योगिकी  और
विपोषण शामिल है।
वर्ष 2010: कोप 16 (कैनकन)
कैनकन समझौतों के परिणाम स्वरुप , जलवायु परिवर्तन  से निपटने में विकासशील देशों की सहायता हेतु सरकारों
से व्यापक पैकेज प्रस्तुत किया गया।
हरित जलवायुकोष, प्रोद्योगिकी तंत्र  कैनकन अनकुूलन ढांँचे की स्थापना की गई।
वर्ष 2011: कोप17 (डरबन)
सरकार 2015 तक वर्ष  2020 से आगे की अवधि  हेतु एक नए सार्वभौमिक  जलवायु परिवर्तन समझौते के लिए
प्रतिबद्ध  है  (जिसके परिणामस्वरूप  2015 का पेरिस समझौता हुआ)।
वर्ष 2015: कोप21 (पेरिस)
वैश्विक  तापमान को पूव-औधोगिक समय से 2.0oC से नीचे रखना तथा और अधिक  सीमित  (1.5oC तक) करने
का प्रयास करना।
इसके लिए अमीर देशों को वर्ष 2020 के बाद भी सालाना 100 अरब डॉलर की फंडिंग प्रतिज्ञा बनाए रखने की आवश्यकता है।
वर्ष 2016: कोप22 (माराकेश)
पेरिस  समझौते की नियम पुस्तिका  लिखने  की दिशा में आगे बढ़ना।
जलवायु कारवाई हेतु माराकेश साझेदारी की शुरूआत की।
वर्ष 2017: कोप23, बॉन (जर्मनी)
देशों द्वारा इस बारे में बातचीत करना जारी रखा गया कि  समझौता 2020 से कैसे कार्य करेगा।
डोनाल्ड ट्रम्प ने इस वर्ष की शुरूआत में पेरिस  समझौते से हटने के अपने इरादे की घोषणा की।
यह एक छोटे द्विपीय विकासशील राय द्वारा आयोजित किया जाने वाला पहला कोप था, जिसमे फिजी  ने राष्ट्रपति का पद संभाला था।
वर्ष 2018: कोप24, काटोवाइस (पोलैंड )
इसके तहत वर्ष 2015 के पेरिस  समझौते को लागू करने के लिए  एक ‘नियमपुस्तिका’ को अंतिम रूप दिया गया था।
नियम पुस्तिका में  जलवायु व पोषण सुविधाएँ और राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान के अनुसार की जानेवाली कारवाई शामिल है ।
वर्ष  2019: कोप25, मैडरिड (स्पेन)
इस दौरान बढ़ती जलवायु तात्कालिकता  के संबंध में कोई ठोस योजना मौजदू नहीं थी।

वर्ष 2022:कोप 27,मिस्र (शर्म-अल-शेख)

लाइफ : लाइफस्टाइल फॉर द एनवायरनमेंट’

सीओपी28 में अक्षय ऊर्जा को तीन गुना करने पर कितना ध्यान केंद्रित किया जाएगा और इस पर अधिक ध्यान दिया जाएगा कि इसका कार्यान्वयन कैसा दिखता है। अब तक आईपीसीसी सहित जो भी रिपोर्ट आयी हैं उनसे ऐसा संकेत मिलता है कि ग्लोबल वार्मिंग को लगभग 2.4 से 2.6 डिग्री तक कम करने की जरूरत है।

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