April 17, 2026

यूक्रेन से लौटे छात्रों की शिक्षा अधर में, मिल सकता है पढ़ाई पूरा करने का मौका…

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रूस-यूक्रेन के बीच यूद्ध का असर वहां हजारों की संख्या में मेडिकल की पढ़ाई कर रहे भारतीय छात्रों पर भी पड़ा है। ज्यादातर छात्रों ने यूक्रेन छोड़ दिया है और कईयों को सरकार सुरक्षित वापस भारत ले आई है। इनमें से ज्यादतर मेडिकल के छात्र हैं। अब इन छात्रों की शिक्षा अधर में लटक चुकी है, क्योंकि ये छात्र कब वापस जाएंगे और कब इनकी पढ़ाई दोबारा शुरू हो पाएगी? यह कहना अभी मुश्किल है।


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सरकार कर रही विचार-

यूक्रेन से वापस लौटे ऐसे छात्र जिनके पाठ्यक्रम समाप्त नहीं हुए हैं उन्हें सुविधा देने के लिए सरकार जल्द ही कोई फैसला ले सकती है। ऐसी उम्मीद जताई जा रही है कि सरकार नेशनल मेडिकल कमीशन से बात कर के फॉरेन मेडिकल ग्रेजुएट लाइसेंसिंग रेगुलेशन एक्ट-2021 में बदलाव कर सकती है। खबरों के अनुसार इस मुद्दे पर इसी हफ्ते बैठक भी आयोजित की जा सकती है।

एफएमजीएल नियम-

फॉरेन मेडिकल ग्रेजुएट लाइसेंसिंग (FMGL) रेगुलेशन एक्ट-2021 के अनुसार किसी भी विदेशी मेडिकल कॉलेज के छात्र को भारत में प्रैक्टिसिंग के लिए स्थायी पंजीकरण की आवश्यकता होती है। स्थायी पंजीकरण के लिए छात्रों के पास में न्यूनतम 54 महीनों की शिक्षा और एक साल की इंटर्नशिप होनी जरूरी है। इसके बाद ही छात्र एफएमजीई परीक्षा को पास कर के भारत में प्रैक्टिसिंग के लिए स्थायी पंजीकरण को प्राप्त कर सकते हैं।



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प्रवेश-

ऐसी कई खबरें सामने आई हैं जिनमें कहा जा रह है कि सरकार यूक्रेन से वापस लौटे छात्रों का डाटा इकट्ठा करवा रही है। ऐसी उम्मीद है कि इन छात्रों को भारत या किसी अन्य देश के विश्वविद्यालय में प्रवेश दिलाकर बचे हुए पाठ्यक्रम को पूरा करवा सकती है। हालांकि, यह उपाय तब अपनाए जाएंगे जब यूक्रेन में हालात सामान्य न हो रहे हों। अगर यूक्रेन में जल्द ही हालात सामान्य हो जाते हैं तो छात्रों को वापस बुलाया जा सकता है।

क्रेडिट ट्रांसफर स्कीम की मांग-

लंबे समय छात्र देश में क्रेडिट ट्रांसफर स्कीम की मांग भी कर रहे हैं। क्रेडिट ट्रांसफर स्कीम का आशय उस व्यवस्था से है जिसमें एक छात्र को पाठ्यक्रम के दौरान कॉलेज बदलने की सुविधा प्रदान की जाए। विभिन्न यूरोपियों और अन्य देशों में छात्रों को यह सुविधा दी जाती है। अगर यह व्यवस्था भारत में भी लागू हो जाए तो यूक्रेन से लौटे छात्रों के साथ-साथ भविष्य के भी छात्रों के लिए भी सुविधा मिलेगी। इसका फायदा यह होगा कि कॉलेजों में सीटों की संख्या में इजाफा होगा और अधिक छात्रों को मेडिकल शिक्षा का फायदा मिल सकेगा।



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सीटें बढ़ाई जाए-

यूक्रेन से लौटे छात्रों के पाठ्यक्रम को पूरा कराने में एक बड़ी समस्या कॉलेज में कम सीटों की उपलब्धता भी है। हम पहले भी इस बात को बता चुके हैं कि भारत से बड़ी संख्या में छात्रों के बाहर पढ़ने जाने का एक बड़ा कारण देश में मेडिकल सीटों की कमी भी है। इस चुनौती से निबटने के लिए सरकार को नए सरकारी मेडिकल कॉलेजों का निर्माण और निजी संस्थानों में सीटों की संख्या बढ़ाना चाहिए। इसके अलावा सरकार चाहे तो विभिन्न जिला अस्पतालों तक में भी मेडिकल की पढ़ाई के लिए सीटों की व्यवस्था करा सकती है।

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फीस-

हाल ही में यह सूचना आई है कि सरकार आगामी सत्र से सभी निजी मेडिकल शिक्षण संस्थानों में के 50 फीसदी सीटों के शुल्क को सरकारी मेडिकल कॉलेज के बराबर करने पर फैसला ले सकती है। अगर यह फैसला लागू होता है तो अनगिनत छात्रों को इसका फायदा मिलेगा। इस फैसले में कॉलेजों की ओर से लगाए जाने वाले कैपिटेशन फीस पर भी रोक लगाने की बात की गई है। इसके साथ ही सरकार चाहे तो इस बात का भी उपाय कर सकती है कि यूक्रेन से लाखों रुपये का नुकसान उठाकर वापस लौटे छात्रों को नए कॉलेज की फीस में रियायत दी जाए। इससे उन छात्रों को और अधिक राहत मिलने की उम्मीद है।

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