July 24, 2024

राजिम कुंभ मेले का होगा भव्य तरीके से आयोजन जाने क्या है इसका महत्त्व…

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रायपुर : राजिम कुंभ को राजिम पुन्नी मेला के तौर पर भी जाना जाता है।  छत्तीसगढ़ राजिम जिले के राजिम नगर में हर साल आयोजित होने वाला हिन्दू धार्मिक मेला है । जिसमें बड़ी संख्या में लोग हिस्सा लेते हैं। राजिम में भगवान विष्णु का मंदिर है । जो पैरी,सोंढूर और महानदी के संगम स्थल पर बना हुआ है। राजिम एक प्राचीन स्थल है। जो अपनी सांस्कृतिक और धार्मिक महत्वपूर्णता के लिए प्रसिद्ध है। यहां कई पुरातात्विक स्थल, मंदिर और धार्मिक स्थल हैं। जो लोगों को आकर्षित करते हैं। राजिम के पास कुछ प्रमुख धार्मिक स्थल हैं जैसे कि राजिम का महाकालेश्वर मंदिर, जगन्नाथ मंदिर, राजिम झील प्रसिद्ध है।

क्या है राजिम की धार्मिक मान्यता ?

बता दें कि राजिम को लेकर कोई पक्का इतिहास मौजूद नहीं है,लेकिन एक कथा राजिम के कुलेश्वर मंदिर से जुड़ी हुई है । जिसमें ऐसा माना जाता है कि ब्रह्मांड के निर्माण के समय भगवान विष्णु के नाभि से कमल के पत्ते पृथ्वी पर गिरे। जहां ये पत्ते गिरे वो क्षेत्र पद्म या कमल क्षेत्र में बदल गए। राजिम का कुलेश्वर मंदिर इन सभी क्षेत्रों का केंद्र बना। जिसके चारों ओर पांच शिवलिंग स्थापित हुए। इन शिवलिंगों को क्षेत्र की सीमा को निर्धारित करके स्थापित किया गया है। राजिम अपने कुंभ मेले के लिए भी जाना जाता है।


जिसमें संतों समेत बड़ी संख्या में श्रद्धालु पवित्र नदी में डुबकी लगाते हैं। इसलिए इसे छत्तीसगढ़ का प्रयाग  भी कहा जाता है। साथ ही साथ त्रिवेणी संगम की ही तरह यहां तीन नदियों का भी संगम है। यही वजह है कि कई लोग परिजनों की मृत्यु के बाद उनका अंतिम संस्कार राजिम में ही करते हैं।

राजिम कुंभ मेले का महत्व

भारतीय सांस्कृतिक परंपरा मेले का बहुत महत्व है। मेला का आयोजन विशेष धार्मिक आधार पर होता है। इसमें भगवान शिव, पार्वती, और गणेश की पूजा की जाती है। मेले के दौरान, लोग स्नान करने के लिए नदी में जाते हैं। फिर पवित्र स्थानों पर पूजा-अर्चना करते हैं। यहां भगवान शिव के मंदिरों में भी भक्ति आराधना की जाती है। मेले के दौरान स्थानीय सांस्कृतिक कला और विरासत का प्रदर्शन भी किया जाता है।

कब से शुरू होता है राजिम मेला ?

राजिम कुम्भ का मेला प्रतिवर्ष माघ पूर्णिमा से शिवरात्रि तक चलता है। इस दौरान प्रशासन द्वारा विविध सांस्कृतिक व धार्मिक आयोजन आदि होते रहते है। संगम स्थल पर कुलेश्वर महादेव जी विराजमान है, वर्ष 2001  से राजिम मेले को राजीव लोचन महोत्सव के रूप में मनाया जाता था और अब 2019 से राजिम पुन्नी मेला महोत्सव मनाया जाएगा। यह आयोजन छत्तीसगढ़ शासन संस्कृति विभाग व स्थानीय आयोजन समिति के सहयोग से होता है,मेला की शुरुआत कल्पवाश से होती है ।  इस वर्ष 22 फरवरी से राजिम कुंभ मेले की शुरूआत होगी। जिसमे यह आयोजन 15 दिनों तक चलेगा। बता दें कि राजिम कुंभ में अयोध्या, बनारस, काशी, मथुरा के साधु-संतों का जमावड़ा देखने को मिलेगा।

राजिम अपने आप में एक विशेष महत्त्व रखने वाला एक छोटा सा शहर है राजिम गरियाबंद जिले का एक तहसील है प्राचीन समय से राजिम अपने पुरातत्वो और प्राचीन सभ्यताओ के लिए प्रसिद्ध है राजिम मुख्य रूप से भगवान  राजीव लोचन के मंदिर के कारण प्रसिद्ध है। राजिम का यह मंदिर आठवीं शताब्दी का है। यहाँ कुलेश्वर महादेव का भी मंदिर है। जो संगम स्थल पर विराजमान है। राजिम कुम्भ का मेला प्रतिवर्ष माघ पूर्णिमा से शिवरात्रि तक चलता है। इस दौरान प्रशासन द्वारा विविध सांस्कृतिक व धार्मिक आयोजन आदि होते रहते है।

पांच साल बाद लगेगा राजिम कुंभ मेला

बता दें कि छत्तीसगढ़ में बीजेपी की सरकार बनने के 5 साल एक बार फिर भव्य तरीके से कुंभ मेले का आयोजन किया जाएगा। राजिम मंदिर के चारों ओर परिक्रमा पथ बनाया जाएगा । छत्तीसगढ़ के मैनपाट और चैतुरगढ़ जैसे हिल स्टेशन में शिमला, मनाली की तर्ज पर मॉल रोड बनाए जाएंगे। मेले को लेकर बैठक में स्कूल शिक्षा, उच्च शिक्षा, पर्यटन, संस्कृति एवं धर्मस्व मंत्री बृजमोहन अग्रवाल ने प्रदेशहित में कई अहम फैसले लिए।

भव्य तरीके से होगा आयोजन

कुंभ मेले को लेकर तैयारियां जोरो शोरो से चल रही हैं। मंत्री अग्रवाल ने राजिम मंदिर के चारों ओर परिक्रमा पथ बनाने के निर्देश दिए। पर्यटन के प्रचार-प्रसार और विकास को लेकर मंत्री अग्रवाल ने छत्तीसगढ़ में मैनपाट जैसे हिल स्टेशन वाले शहरों में शिमला, मनाली के तर्ज पर मॉलरोड बनाएंगे। सरगुजा के रामगढ़ और चैतुरगढ़ जैसे स्थानों का विकास हिल स्टेशन के रूप में करेंगे ताकि यहां राज्य के साथ-साथ राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय पर्यटकों को लुभा सके।

इस धार्मिक मेले का नाम राजिम कुंभ से बदलकर राजिम माघी पुन्नी मेला कर दिया है ।

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