कर्नाटक में कैसे शुरू हुआ स्कूलों में हिजाब विवाद …
डेस्क रिपोर्टर|| इसकी शुरुआत दिसंबर के आखिर में कर्नाटक के तटीय जिले उडुपी से हुई. जहां 06 छात्राओं ने क्लास में बगैर हिजाब उतारे पढ़ने से मना कर दिया. ये एक प्री यूनिवर्सिटी गर्वनमेंट कॉेलज में दूसरे वर्ष की छात्राएं हैं. इनसे पहले स्कूल मैनेजमेंट और फिर जिलास्तरीय शिक्षा विभाग ने जब हिजाब उतार कर क्लास में बैठने को कहा तो उन्होंने इसे धार्मिक मामला बताते हुए इनकार कर दिया.

इसके बाद जब उन छात्राओं पर ऐसा नहीं करने और स्कूल यूनिफॉर्म को लेकर दबाव डाला गया तो उन्होंने विरोध प्रदर्शन किया. आपने जगह जगह 05 छात्राओं को ये पोस्टर लिए खड़े देखा होगा, जिसमें लिखा था कि हिजाब पहनना उनका अधिकार है.
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दरअसल जिस स्कूल में छात्राएं हिजाब नहीं उतारने पर डटी हुईं थीं, वो को-एड नहीं बल्कि केवल महिलाओं का ही है. लिहाजा स्कूल प्रशासन का तर्क उचित लगता है कि केवल पढ़ते समय हिजाब उताने में कोई हर्ज नही है, खासकर इसलिए भी क्योंकि ये स्कूल केवल छात्राओं का है.
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स्कूल प्रशासन का कहना है कि हिजाब को लेकर विरोध प्रदर्शन करने वाली छात्राएं आमतौर पर स्कूल देर से आती हैं. पढ़ाई में ज्यादा दिलचस्पी नहीं लेतीं. हालांकि मीडिया में खबरें कहती हैं कि छात्राएं इस बात का खंडन करती हैं कि वो अनुशासनहीन हैं और देर से आती हैं.

कितनी छात्राएं हैं इस स्कूल में
उडुपी के जिस कॉलेज से विवाद की शुरुआत हुई, वहां 1000 के आसपास छात्राएं हैं, इनमें 75 मुसलमान हैं. इन 06 छात्राओं को छोड़कर अन्य मुस्लिम छात्राओं को स्कूल के नियमों से कोई दिक्कत नहीं है. स्कूल का तर्क है, उन्हें इस बात पर कोई एतराज नहीं है कि स्कूल कैंपस में छात्राएं हिजाब पहनकर घूमें लेकिन क्लास में लेक्चर के दौरान ऐसा नहीं करें.

इन छात्राओं ने इसके जवाब में ये कहा कि “हमें पांच-छह पुरुष लेक्चरर भी पढ़ाने आते हैं. हमें मर्दों के सामने सिर ढंकना होता है, इसलिए ही हम हिजाब पहनती हैं.”
फिर गर्माने लगा ये मामला
इसके बाद ये मामला गर्माने लगा. इसकी खबरें कॉलेज से बाहर फैलीं तो ये सियासी और धार्मिक मामला बनने लगा. इसे लेकर पक्ष और विपक्ष में प्रदर्शन होने लगे. इसके बाद तो ये कर्नाटक में इस कदर तीव्र हो गया कि कर्नाटक सरकार को सभी स्कूल और कॉलेजों को 03 दिन बंद करने की छुट्टी का आदेश देना पड़ा. आगे ये मामला कैसे सुलझेगा, अभी तय नहीं. वैसे ये मामला हाईकोर्ट में विचाराधीन है. कोर्ट इस पर फैसला देगा.
