सार्स-कोव-2 वैरिएंट जेएन.1 (JN.1) इंग्लैंड, फ़्रांस, आइसलैंड समेत अमेरिका जैसे देशों में बहुतायत में फैल चुका है। दुनियाभर में भीषण तबाही मचाने वाली महामारी कोविड-19 का कहर अभी भी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ था।किआये दिन कोरोना वायरस के नए-नए वेरिएंट सामने आते ही जा रहे हैं, जिसको लेकर वैज्ञानिकों और डॉक्टर्स की चिंता बढ़ जाती है। हाल ही में कोरोना का एक नया वेरिएंट दनिया के कुछ देशों में मिला है, जिसको लेकर वैज्ञानिक चिंता में पड़ गए हैं। हम बात कर रहे हैं कोरोना के नए JN.1 वेरिएंट की, यह वेरिएंट अब तक सामने आए सभी वेरिएंट्स से ज्यादा खतरनाक बताया जा रहा है। वैज्ञानिकों के मुताबिक यह अन्य वेरिएंट्स की तुलना में ज्यादा संक्रामक है। यही नहीं यह इम्यून सिस्टम के लिए भी हानिकारक साबित हो सकता है। कोरोना के इस नए वेरिएंट की पहचान शुरुआत में 25 अगस्त, 2023 को लक्जमबर्ग में हुई थी,इस वेरिएंट के लक्षण भी कोविड के पुराने वेरिएंट्स से मिलते-जुलते ही हैं।
JN.1 से संक्रमित मरीजों में पाए जाने वाले लक्षण
बुखार और ठंड लगना
सीने में दर्द
सांस लेने में दिक्कत
गले में खराश और चुभन
मांसपेशियों में दर्द और थकान
सिरदर्द और नाक बंद होना
उल्टी और मतली
स्वाद न मिलना
कोरोना में हो रहा है लगातार म्यूटेशन
नेचर जर्नल में इस सप्ताह प्रकाशित नई लैब रिपोर्ट में बताया गया है कि ओमिक्रॉन के बीए.2.86 वैरिएंट में नए म्यूटेशन देखे गए हैं कि जिससे कोरोना के एक नए वैरिएंट जेएन.1 के बारे में पता चला है।न्यूयॉर्क के बफ़ेलो विश्वविद्यालय में संक्रामक रोग के प्रमुख डॉ. थॉमस रूसो के हवाले से टीओआई ने कहा, “इसके स्पाइक प्रोटीन में उत्परिवर्तन (Mutation) के कारण, जेएन.1 अपने ओरिजिन की तुलना में प्रतिरक्षा से बहुत अधिक बच निकलने वाला लगता है, जिससे यह काफी चालाक हो जाता है। परिणामस्वरूप, हमें अधिक संक्रमण होने का खतरा हो सकता है।” शोधकर्ता बताते हैं कि, बढ़ते एंटीबॉडी पुशबैक से बचने के लिए कोरोनोवायरस लगातार उत्परिवर्तन कर रहा है। टीकाकरण और संक्रमण के बाद हमारे शरीर ने सीख लिया है कि इन वायरस से कैसे लड़ना है?
जेएन.1 के साथ यूएस के कई हिस्सों में एक और नए वैरिएंट एचवी.1 के बारे में भी पता चला है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक पहले से ही मौजूद ईजी.5 की तरह के ही एक और नए वैरिएंट एचवी.1 के बारे में कुछ-कुछ रिपोर्ट्स में पता चला है। ये दोनों संयुक्त राज्य अमेरिका में अभी के लगभग आधे से अधिक कोविड-19 मामलों के लिए प्रमुख कारण हैं। रोग नियंत्रण और रोकथाम केंद्र (सीडीसी) के अनुसार, HV.1, EG.5 से ही निकला है और काफी हद तक एक समान है। ये टीके के खिलाफ कितना अच्छा प्रदर्शन करते हैं, इस पर अभी तक कोई डेटा प्राप्त नहीं है।
बचाव के तरीके :
कोरोनावयरस लगातार म्युटेशन करता ही जा रहा है, इसलिए संक्रमण का जोखिम हमेशा बना हुआ है। और इसके बचाव के लिए कोविड एप्रोप्रिएट बिहेवियर का पालन करते रहना सबसे आवश्यक है। वैंडरबिल्ट विश्वविद्यालय स्कूल ऑफ मेडिसिन के प्रोफेसर और संक्रमण रोग विशेषज्ञ विलियम शाफनर की माने तो HV.1 वेरिएंट का सर्कुलेशन तो काफी तेज है, लेकिन संक्रमण उतना गंभीर नहीं है। हालांकि उन्होंने लोगों को सतर्क रहने की सलाह जरूर दी है।ऐसे में कोरोना के नए वेरिएंट JN.1को लेकर लगातार रिसर्च की जा रही है।