Makar Sankranti 2024: मकर संक्रांति के धार्मिक और वैज्ञानिक दृष्टि से क्या है महत्व…

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मकर संक्रांति का पर्व पौष मास के शुक्ल पक्ष में मनाया जाता है। इस दिन से सूर्य दक्षिणायन से उत्तरायण होने लगते हैं जिससे मौसम में बदलाव आना शुरू हो जाता है। शरद ऋतु धीरे-धीरे समाप्त होने लगती है और बसंत का आगमन होने लगता है। सूर्य का एक राशि से दूसरी राशि में जाना संक्रांति कहलाता है। साथ ही इस अवसर को देश के विभिन्न प्रांतों में अलग-अलग त्योहार जैसे लोहड़ी, कहीं खिचड़ी, कहीं पोंगल आदि के रूप में मनाते हैं। हिंदू धर्म में मकर संक्रांति एक ऐसा त्योहार है जिसका धार्मिक के साथ वैज्ञानिक महत्व भी है ।

मकर संक्रांति धार्मिक महत्व

  • धार्मिक महत्त्व से देखे तो मकर संक्रांति को देवताओं का दिन बताया गया है। मान्‍यता है कि इस दिन किया गया दान सौ गुना होकर वापस लौटता है।
  • मकर संक्रांति से अच्छे दिनों की शुरुआत हो जाती है, क्योंकि इस दिन मलमास समाप्त होते हैं। इसके बाद से सारे मांगलिक कार्य विवाह, मुंडन, जनेऊ संस्कार आदि शुरू हो जाते हैं।
  • धार्मिक मान्यता है कि मकर संक्रांति के दिन स्वर्ग का दरवाजा खुल जाता है। इस दिन पूजा, पाठ, दान, तीर्थ नदी में स्नान करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है। पौराणिक कथा के अनुसार भीष्म पितामह को इच्छा मृत्यु का वरदान प्राप्त था, लेकिन दक्षिणायन सूर्य होने के कारण
  • बाणों की शैया पर रहकर उत्तरायण सूर्य का इंतजार करके मकर संक्रांति होने पर उत्तरायण में अपनी देह का त्याग किया, ताकि वह जन्म-मरण के बंधन से मुक्त हो जाएं।
  • मां गंगा मकर संक्रांति वाले दिन पृथ्वी पर प्रकट हुईं। गंगा जल से ही राजा भागीरथ के 60,000 पुत्रों को मोक्ष मिला था। इसके बाद गंगा जी कपिल मुनि के आश्रम के बाहर सागर में जाकर मिल गईं।

मकर संक्रांति वैज्ञानिक महत्व

  • सूर्य के उत्तरायण हो जाने से प्रकृति में बदलाव शुरू हो जाता है । ठंड की वजह से ठिठुरते लोगों को सूर्य के तेज प्रकाश के कारण शीत ऋतु से राहत मिलना आरंभ होता है । हालांकि मकर संक्रांति पर ठंड तेज होती है, ऐसे में शरीर को गर्म रखने वाली खाद्य साम्रगी खाई जाती है। इस वजह से मकर संक्रांति पर तिल, गुड़, खिचड़ी खाते हैं ताकि शरीर में गर्माहट बनी रहे।
  • पुराण और विज्ञान दोनों में मकर संक्रांति यानी सूर्य की उत्तरायण स्थिति का अधिक महत्व है। सूर्य के उत्तरायण से रातें छोटी और दिन बड़े होने लगते हैं। कहते हैं उत्तरायण में मनुष्य प्रगति की ओर अग्रहसर होता है।
  • मकर संक्रांति पर पतंग उड़ाने के महत्व भी विज्ञान से जुड़ा है। सूर्य का प्रकाश शरीर के लिए स्वास्थवर्धक और त्वचा तथा हड्डियों के लिए बेहद लाभदायक होता है। यही कारण है कि पतंग उड़ाने के जरिए हम कुछ घंटे सूर्य के प्रकाश में बिताते हैं ।
  • इस दिन खिचड़ी खाने का महत्व यह है की यह पाचन को दुरुस्त रखकर रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाती है ।
  • मकर संक्रांति पर स्नान करने का महत्व यह है की इस समय नदियों में वाष्पन क्रिया होती है जो किसी भी रोग से लड़ने में मदद करती है।

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