June 28, 2026

श्री रावतपुरा सरकार युनिवर्सिटी में श्री शंकरभारती महास्वामी का उद्बोधन…

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रायपुर। श्री रावतपुरा सरकार युनिवर्सिटी परिसर में योगानन्देश्वर सरस्वती मठ के मठाधिपति श्री श्री शंकरभारती महास्वामीजी का उद्बोधन हुआ। इस कार्यक्रम में सर्वप्रथम स्वामीजी का स्वागत श्रीफल एवं पुष्पवर्षा के साथ श्री रावतपुरा सरकार युनिवर्सिटी परिसर में स्थित आस्था मंच में किया गया। तदुपरांत दीप प्रज्वलन एवं मां सरस्वती का पूजन स्वामी जी एवं विश्वविद्यालय के कुल सचिव डॉ. प्रताप सिंह द्वारा किया गया।



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अतिथि देवोभव की परंपरानुसार युनिवर्सिटी के कुल सचिव डॉ. प्रताप सिंह ने श्री श्री शंकर भारती महास्वामीजी का स्वागत फल की टोकरी के साथ किया।



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इसके उपरान्त युनिवर्सिटी के कुल सचिव डॉ. प्रताप सिंह ने विश्वविद्यालय के विजन एवं उद्देश्य से स्वामीजी को परिचय कराया। साथ ही भारतीय संस्कृति, योग, वेदान्त, धर्म, एवं मानवीय मुल्यों को जन मानस तक पहुचाने हेतु विश्वविद्यालय द्वारा किये गये विविध कार्यों को संक्षिप्त में बतलाया।



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इस कार्यक्रम में श्री श्री शंकरभारती महास्वामीजी ने अपने उद्बोधन में कहा कि सभी व्यक्ति का मुख्य उद्देश्य त्रीविध दुःखों से निवृत्ति है। इन्हीं दुःखों से निवृत्ति का सरल मार्ग आदिगुरू शंकराचार्य जी ने अपने रचित ग्रंथ सौंदर्य लहरी एवं विवेक दीपिनी में किया है। मनुष्य सौन्दर्य लहरी स्त्रोत की स्तुति के माध्यम से इस लौकिक एवं पारलौकिक दुःखों से दूर होकर सुखों को प्राप्त कर सकता है। इसके पाठ से अर्थ प्राप्ति, मानसिक सुख, शांति एवं आत्मलक्ष्य की प्राप्ति भी संभव है। मानवीय जीवन में सुख की प्राप्ति हेतु श्रीविद्या की नित्य उपासना करनी चाहिए। आदिगुरू शंकराचार्य जी ने विवेक दीपिनी स्त्रोत की रचना मनुष्य के दुःखों को दूर करने के लिये किया है। स्वामीजी ने अपने उद्बोधन में श्री रावतपुरा सरकार युनिवर्सिटी द्वारा चलाये जा रहे विविध शैक्षिक कार्यों एवं विश्वविद्यालय के आध्यात्मिक एवं प्राकृतिक वातावरण की प्रशंशा की।



कार्यक्रम के अन्त में विश्वविद्यालय के अधिष्ठाता छात्र कल्याण डॉ. कप्तान सिंह ने सभी को उनके सहयोग के लिए धन्यवाद ज्ञापन किया। कार्यक्रम की सफलता पर श्री रावतपुरा सरकार युनिवर्सिटी के प्रति-कुलाधिपति डॉ. जे.के. उपाध्याय जी ने हार्दिक प्रसन्नता व्यक्त की।






 

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