वैज्ञानिकों को मिला प्राचीन ‘बीयर डॉग’: अपने समय का बेहद भयावह, खतरनाक शिकारी और 320KG वजन…
यूरोपीय देशों में 75 लाख साल पहले एक ऐसा मांसाहारी शिकारी कुत्ता घूमता था, जो भालू के आकार का होता था। इसका वजन करीब 320 किलोग्राम था। अब यह प्रजाति विलुप्त हो चुकी है। लेकिन इसका अवशेष मिलना पुरा-जीव विज्ञानियों के लिए खुशी की बात है। क्योंकि उन्हें इस प्रजाति के बार में ज्यादा अध्ययन करने का अवसर मिलेगा। आधा कुत्ता और आधा भालू जैसे इस जीव के इतिहास के बारे में जानकारी मिलेगी।
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बता दें की बीयर डॉग नाम से आमतौर पर जाना जाने वाला यह जीव असल में द टारटारोसियोन के नाम से जाना जाता था। यह खोज वैज्ञानिकों की अंतरराष्ट्रीय टीम ने किया है। जिसके लीडर है स्विट्जरलैंड के बेसल स्थित नेचुरल हिस्ट्री म्यूजियम के बास्टियन मेनेकार्ट।
मजबूत जबड़ा, धारदार दांत, गजब का शिकारी इस प्राचीन शिकारी को नई प्रजाति का बीयर डॉग बताया जा रहा है। यह यूरोप में 3.6 करोड़ साल से 75 लाख साल तक था। उसके बाद इसकी प्रजाति लुप्त हो गई। पुरा-जीव विज्ञानियों यानी पैलियोटोंलॉजिस्ट ने कहा कि इसके जबड़े की जांच से पता चला कि इसकी उम्र 1.28 करोड़ से 1.20 करोड़ साल के बीच थी। इसके जबड़े की हड्डियों में समुद्री खनिजों की परत चढ़ी हुई थी। परत हटाने पर पता चला कि इसके दांत बेहद नुकीले और धारदार थे। ये अपने से बड़े जानवरों का भी शिकार कर लेता था।
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माइथोलॉजिकल जीव टारटारो से लिया गया नाम बीयर डॉग द टारटारोसियोन सामान्य एंफीसियोनिडे का उदाहरण नहीं है। इसके जबड़े में मौजूद चौथा लोअर प्रीमोलर दांत बाकी एंफीसियोनिडे जीवों से अलग है। इस दांत की जांच से किसी भी जीव की प्रजाति और जेनेरा समझने में आसानी होती है. इसका नाम बास्क माइथोलॉजी में बताए गए एक आंख वाले विशालकाय जीव टारटारो के नाम पर रखा गया है।
जीनस का नाम फ्लोरियल सोल रखा गया है टारटारो के ज्यादातर अवशेष बीयर्न में मिले हैं। नेचुरल हिस्ट्री म्यूजियम के जॉन-फ्रांस्वा लेस्पोर्ट और एंटनी हीट्ज दुनिया के प्रसिद्ध पुरा-जीव विज्ञानियों ने मिलकर इस नए जीनस का नाम फ्लोरियल सोल रखा है। बीयर डॉग उन मांसाहारी जीवों से समानता रखते हैं जो उस समय आकार में बड़े होते थे। जैसे की कुत्ते, बिल्ली, सील और बैजर्स।
उल्लेखनीय हैं की ये शिकारी बीयर डॉग 2.30 करोड़ साल से लेकर 53 लाख साल तक घूमते रहे। इसकी प्रजाति में काफी ज्यादा विभिन्नताएं थीं। इनका वजन 9 किलोग्राम से लेकर 320 किलोग्राम तक जाता था। टारटारोसियोन का वजन आमतौर पर 200 किलोग्राम होता था। मायोसीन के समय यूरोप का आखिरी एंफीसियोनिडे समाप्त हो गया था।
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