देश में नागरिकता संशोधन अधिनियम हुआ लागू जानिए कहाँ-कहाँ के शरणार्थियों को मिलेगी जगह…
CAA : देश में नागरिकता संशोधन अधिनियम लागू करते ही इस समय देशभर में नागरिकता कानून चर्चा का विषय बना हुआ है। जिसे 11 मार्च से कानून को लेकर अधिसूचना जारी कर दी गई। यह नागरिकता संशोधन विधेयक 2019 को संसद द्वारा पारित किया गया था। बाद में इस विधेयक को राष्ट्रपति का अनुमोदन मिल गया था। नए कानून से पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से आए हिंदू, सिख, जैन, बौद्ध, पारसी और ईसाई समुदायों के प्रवासियों को नागरिकता के लिए पात्र बनाने के लिए नागरिकता अधिनियम, 1955 में संशोधन किया गया है। जिसके तहत अब भारतीय नागरिक बन सकेंगे।

नागरिकता संशोधन कानून आखिर क्या है ?
नागरिकता संशोधन विधेयक 9 दिसंबर 2019 को लोकसभा में प्रस्तावित किया गया था। 9 दिसंबर 2019 को ही विधेयक सदन से पारित हो गया। 11 दिसंबर 2019 को यह विधेयक राज्यसभा से पारित हुआ था। जिसमे नागरिकता अधिनियम में देशीयकरण द्वारा नागरिकता का प्रावधान किया गया है। आवेदक को पिछले पिछले 14 वर्षों में से आखिरी साल 11 महीने भारत में रहना चाहिए। कानून में छह धर्मों (हिंदू, सिख, जैन, बौद्ध, पारसी और ईसाई) और तीन देशों (अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान) जो 31 दिसंबर 2014 से पहले भारत मे निवासरत व्यक्ति नागरिकता पाने के पात्र होंगे।
कानून की मुख्य बातें
नागरिकता अधिनियम, 1955 बताता है कि कोई व्यक्ति छह धर्मों (हिंदू, सिख, जैन, बौद्ध, पारसी और ईसाई) भारतीय नागरिकता किस आधार पर प्राप्त कर सकता है। कोई व्यक्ति भारतीय नागरिक बन सकता है यदि उसका जन्म भारत में हुआ हो या उसके माता-पिता भारतीय हों या कुछ समय से देश में रह रहे हों, आदि। हालांकि, अवैध प्रवासियों को भारतीय नागरिकता प्राप्त करने से प्रतिबंधित किया गया है। अवैध प्रवासी वह विदेशी होता है जो-
(1 ) पासपोर्ट और वीजा जैसे वैध यात्रा दस्तावेजों के बिना देश में प्रवेश करता है, या
(2 ) वैध दस्तावेजों के साथ प्रवेश करता है, लेकिन अनुमत समय अवधि से अधिक समय तक रहता है।
कानून में यह भी प्रावधान है कि यदि किसी नियम का उल्लंघन किया जाता है तो ओवरसीज सिटीजन ऑफ इंडिया (ओसीआई) कार्डधारकों का पंजीकरण रद्द भी किया जा सकता है। विदेशी अधिनियम, 1946 और पासपोर्ट (भारत में प्रवेश) अधिनियम, 1920 के तहत अवैध प्रवासियों को कैद या निर्वासित किया जा सकता है। 1946 और 1920 अधिनियम केंद्र सरकार को भारत के भीतर विदेशियों के प्रवेश, निकास और निवास को विनियमित करने का अधिकार देते हैं। 2015 और 2016 में, केंद्र सरकार ने अवैध प्रवासियों के कुछ समूहों को 1946 और 1920 अधिनियमों के प्रावधानों से छूट देते हुए दो अधिसूचनाएं जारी की थीं। ये समूह अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान से हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई हैं, जो 31 दिसंबर 2014 को या उससे पहले भारत आए थे। इसका मतलब यह है कि अवैध प्रवासियों के इन समूहों को निर्वासित नहीं किया जाएगा।
नागरिकता हासिल करने के योग्य कौन है ?
इस अधिसूचना में केंद्र सरकार ने इन तीन देशों के अल्पसंख्यकों के लिए भारत की नागरिकता हासिल करने की शर्तों में कई तरह की छूट दी गई है। पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफ़ग़ानिस्तान के हज़ारों ग़ैर-मुस्लिम जो भारत की नागरिकता चाहते हैं, उन्हें इसका फ़ायदा मिल सकता है। 31 दिसंबर 2014 से पहले जो भी ग़ैर-मुस्लिम इन तीनों देशों से भारत आए थे, वे सीएए के तहत नागरिकता हासिल करने के योग्य हैं ।
नागरिकता (संशोधन) अधिनियम, 2019, भारत के तीन पड़ोसी देशों से धार्मिक आधार पर प्रताड़ित होकर भारत आए शरणार्थियों को भारत की नागरिकता का अधिकार देने का कानून है। यह नागरिकता देने का कानून है, सीएए से किसी भी भारतीय नागरिक के नागरिकता नहीं जाएगी, चाहे वह किसी भी धर्म का हो। यह कानून केवल उन लोगों के लिए है जिन्हें वर्षों से उत्पीड़न सहना पड़ा और जिनके पास दुनिया में भारत के अलावा और कोई जगह नहीं है।
